अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरु हुए सैन्य संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में एक बार फिर से आग लग गई है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, आज इसमें थोड़ी कमी दिखाई दी। लेकिन इस संघर्ष के चलते तेल की कीमतों में आए उछाल का असर भारत के तेल आयात बिल पर दिख रहा है। जून में देश का कच्चे तेल का आयात बिल एक साल पहले के मुकाबले 48 फीसदी बढ़कर 14.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि इस साल भारत ने पिछले साल की तुलना में कम मात्रा में कच्चा तेल खरीदा।
Crude Oil की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी
मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 0.4 फीसदी गिरकर 88.87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI क्रूड 82.47 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। हालांकि, दोनों प्रमुख बेंचमार्क अभी भी पिछले कारोबारी सत्र में बने एक महीने से अधिक के उच्च स्तर के करीब हैं।
Crude Import कम हुआ लेकिन खर्चा बढ़ा
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत ने 1.89 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 2.03 करोड़ टन था। यानी आयात तेल की मात्रा 7.1 फीसदी कम रही। इसके बावजूद आयात बिल 48 फीसदी बढ़ गया, क्योंकि जून में भारतीय बास्केट कच्चे तेल की औसत कीमत 85.47 डॉलर प्रति बैरल रही, जो एक साल पहले साल 2025 में 69.77 डॉलर प्रति बैरल थी।
भारत द्वारा कच्चे तेल आयात के आंकड़े
| पैरामीटर | जून 2026 | जून 2025 | सालाना बदलाव |
|---|---|---|---|
| कच्चे तेल का आयात बिल (बिलियन डॉलर) | 14.7 | 9.9 | +48% |
| कच्चे तेल का आयात (मिलियन टन) | 18.9 | 20.3 | -7.1% |
| भारतीय बास्केट कच्चे तेल की औसत कीमत (डॉलर/बैरल) | 85.47 | 69.77 | +22.5% |
21 जुलाई को पेट्रोल-डीजल के दाम
क्रूड ऑयल आयात बिल बढ़ने के बाद भी फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर है। फ्यूल के दाम 25 मई को आखिरी बार बढ़ाए गए थे।
| शहर | पेट्रोल (rs/लीटर) | डीजल (rs/लीटर) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| चेन्नई | 107.76 | 99.55 |
| गुरुग्राम | 102.97 | 95.64 |
| नोएडा | 101.96 | 95.44 |
| बेंगलुरु | 110.82 | 98.77 |
| भुवनेश्वर | 110.49 | 102.15 |
| चंडीगढ़ | 101.54 | 89.47 |
| हैदराबाद | 115.69 | 103.82 |
| जयपुर | 112.66 | 97.78 |
| लखनऊ | 101.86 | 95.36 |
| पटना | 113.53 | 99.54 |
| तिरुवनंतपुरम | 115.49 | 104.40 |
रूस से की सबसे ज्यादा खरीद
मिडिल ईस्ट से आपूर्ति प्रभावित होने के बीच जून में भारत ने अपनी करीब 50 फीसदी कच्चे तेल की जरूरत रूस से पूरी की। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और वेनेजुएला भी प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहे। फ्यूल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भारत ने ब्राजील और अंगोला जैसे गैर-पारंपरिक देशों से भी तेल खरीद बढ़ाई।

