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    Home»अजब गजब»भारत का सबसे अमीर गांव, बैंकों को करोड़ों का लोन देने की हैसियत रखते हैं यहां के किसान
    अजब गजब

    भारत का सबसे अमीर गांव, बैंकों को करोड़ों का लोन देने की हैसियत रखते हैं यहां के किसान

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inOctober 22, 2026
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    VIRAL VIDEO: यह कहानी भारत के एक ऐसे अनोखे गांव की है, जिसकी मेहनत और कामयाबी देखकर आज अमेरिका, चीन और दुबई भी हैरान हैं. जहां देश के कई हिस्सों में किसान कर्ज और पानी की किल्लत से परेशान हैं. वहीं, इस गांव के किसान बैंकों को करोड़ों रुपये का कर्ज देने की हैसियत रखते हैं. इस गांव का नाम है हिवरे बाजार. यह महाराष्ट्र के अहिल्या नगर (अहमदनगर) जिले में बसा है. खेती और डेयरी के सहारे गांव की प्रति व्यक्ति आय ₹9 लाख सालाना तक पहुंच चुकी है. यूट्यूबर अंश मिश्रा ने इस गांव जाकर स्थानीय लोगों से बात की है. उन्होंने INDIGO TREKKER  यूट्यूब चैनल पर इस गांव का वीडियो शेयर किया है. इसे अब तक 1 मिलियन के करीब व्यूज मिल चुके हैं.

    सूखे की मार से खुशहाली का सफर

    90 के दशक में इस गांव की तस्वीर आज से बिल्कुल जुदा थी. हिवरे बाजार देश के सबसे सूखाग्रस्त इलाकों में गिना जाता था. पथरीली जमीन, सालाना सिर्फ 200-300 मिलीमीटर बारिश और पीने के पानी की भारी किल्लत. हालात इतने बदतर थे कि करीब 80% लोग गांव छोड़कर पलायन कर चुके थे. घरों में गरीबी, बेरोजगारी, आपसी झगड़े और नशे का बोलबाला था. तभी साल 1989 में गांव की तकदीर ने करवट ली. युवा पोपटराव पवार गांव के सरपंच बने. उन्होंने 26 जनवरी 1990 को ग्राम सभा बुलाई, जहां पूरे गांव ने मिलकर अपनी समस्याओं का हल खुद खोजने की कसम खाई.  

    पानी का बजट और ‘सात सूत्र’ की क्रांति

    हिवरे बाजार ने सरकार या किसी मसीहा का इंतजार नहीं किया. उन्होंने अपनी सबसे बड़ी कमजोरी यानी ‘पानी की कमी’ को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. गांव ने पानी बचाने और उसे सही तरीके से बांटने के लिए वॉटर बजटिंग यानी पानी का बजट शुरू किया. गांव को बदलने के लिए सात गोल्डन रूल (नियम) लागू किए गए.

    1. चराईबंदी: खुले में मवेशी चराने पर रोक.
    2. कुल्हाड़बंदी: पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह बैन.
    3. नसबंदी और नशाबंदी: नशा पूरी तरह प्रतिबंधित.
    4. श्रमदान: गांव के विकास के लिए हर हफ्ते मिलकर काम करना.
    5. बोरवेलबंदी: गहरे ट्यूबवेल खोदने पर रोक, सिर्फ उथले कुओं का इस्तेमाल ताकि भूजल स्तर बना रहे.
    6. फसल प्रबंधन: ज्यादा पानी खाने वाली फसलों जैसे गन्ना और केला उगाने पर पाबंदी.
    7. स्वच्छता अभियान: गांव में पान, तंबाकू या सिगरेट की एक भी दुकान नहीं है.

    खेती और डेयरी ने किया करिश्मा

    जब पानी रुका, तो बंजर जमीन फिर से मुस्कुरा उठी. आज गांव में 400 से ज्यादा कुएं लबालब भरे हैं. किसान अब पारंपरिक फसलों के अलावा प्याज, संतरा, अमरूद, अंजीर और ड्रैगन फ्रूट जैसी महंगी फसलें उगा रहे हैं. खेती के साथ-साथ डेयरी उद्योग ने गांव की अर्थव्यवस्था को पंख लगा दिए हैं. हर दिन गांव में करीब आठ हजार से नौ हजार लीटर दूध का उत्पादन होता है, जो सीधे गांव की सहकारी डेयरी में जाता है. खेती में उतार-चढ़ाव आ भी जाए, तो डेयरी की यह आमदनी किसानों की जेब को कभी खाली नहीं होने देती. 

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