BREKING NEWS

स्वेदशी एआई मॉडल भारतजेन इसी महीने से…

नई दिल्ली– भारतजेन एआई माडल के तहत अब तक 15 भारतीय भाषाओं के लिए सृजनशील कृत्रिम मेधा के मॉडल में भाषाओं के ‘टेक्स’ (भाषा-पाठ) संबंधी काम पूरे कर लिए गए हैं और बाकी भाषाओं के टेक्सट का काम इस माह के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डा. जितेंद्र ङ्क्षसह ने सदन में भारत जेन और एआई के क्षेत्र में सरकार की पहलों से संबंधित भाजपा के भुवनेश्वर कलिता, आम आदमी पार्टी (आप) के राघव चड्ढा और बीजद के डा. सस्मित पात्रा आदि के अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर में कहा कि भारत जेन सरकार के स्वामित्व में विकसित की जा रही पहल है जो अपने आप में संप्रभु भी है। इसके लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बांबे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास को हब बनाया गया है। डा. ङ्क्षसह ने कहा कि ‘भारत जेन प्रधानमंत्री द्वारा मार्च 2024 में शुरू की गई इंडिया एआई मिशन की ही एक उत्पत्ति है।

यह सरकार के स्वामित्व में एक सावरेन (संप्रभु) संस्थान है। उन्होंने एक सवाल पर स्पष्ट किया कि यह सरकारी पहल जरूर है, लेकिन यह अपने मामलों में स्वायत्त होने के कारण संप्रभु है। इसका डाटा इंडिया नियम और शर्तों के साथ दूसरों के साथ भी साझा किया जा सकता है। बता दें कि भारतजेन एआई की सीधी टक्कर चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी जैसे एआई प्लेटफॉम्र्स से होगी। उन्होंने कहा कि भारतजेन के अंतर्गत भारतीय भाषाओं और भारतीय समाज के संदर्भों के आधार पर मल्टी लार्ज लैंग्वेज मॉडलों का विकास किया जा रहा है। इसमें आठवीं अनुसूची के अंतर्गत आनेवाली सभी भाषाओं के टेक्सट, स्पीच और विजन ( लिखित पाठ, वाणी और छवियां) पर केंद्रित जनरेटिव (सृजनशील) एमएलएल एआई मॉडल के विकास पर काम चल रहा है जिसके आधार पर उपयोग आगे आयुर्वेद, कृषि और अन्य क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं में एआई के लोगों के उपयोग के लिए तरह तरह के एआई मॉडल विकसित किए जाएंगे।

Related Articles

Back to top button