ईरान-अमेरिका के बीच जंग फिर शुरू हो गई है, इसी बीच मध्य-पूर्व में एक और युद्ध की आहट सुनाई दे रही है. ईरान के प्रॉक्सी माने जाने वाले हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर मिसाइलें और ड्रोन छोड़ दिए हैं. उनकी ये प्रतिक्रिया यमन के सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले के बाद आई है. दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव चला आ रहा था लेकिन मार्च, 2022 में हुए संघर्षविराम के बाद हुई ये पहली हिंसक घटना है, जब दोनों पक्ष आमने-सामने खड़े हैं.
इस मसले को और गंभीर बनाया है अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस (Axios) की एक रिपोर्ट ने, जिसके मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने यमन में ईरान समर्थित हूती ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई शुरू करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से समर्थन मांगा था. रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि एमबीएस ने अभियान शुरू होने से पहले ट्रंप को इसकी जानकारी दी और इस कार्रवाई के लिए अमेरिका का समर्थन भी मांगा.
हूतियों से भरा था विमान, सऊदी ने उतरने नहीं दिया
मौजूदा घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई, जब ईरान की माहान एयरलाइंस का एक विमान हूती नियंत्रण वाले सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा. बताया गया कि इस विमान में हूती प्रतिनिधिमंडल सवार था, जो ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ईरान जा रहा था. रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने इस उड़ान का विरोध किया क्योंकि उसे आशंका थी कि इस विमान का इस्तेमाल हूतियों तक हथियार, मिसाइलों के पुर्जे या ईरानी सैन्य कर्मियों को पहुंचाने के लिए किया जा सकता है. एक्सियोस से बात करने वाले अमेरिकी अधिकारियों ने महान एयरलाइंस को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी एयरलाइन बताया. रिपोर्ट में कहा गया है कि जब यह विमान बाद में वापस लौटने की कोशिश कर रहा था, तब सऊदी सेना ने यमन के सना हवाई अड्डे पर हमला कर दिया. इसकी वजह से मची अफरा-तफरी के बाद विमान को अपना रास्ता बदलकर यमन के लाल सागर तट पर स्थित अल हुदायदाह में उतरना पड़ा. सऊदी समर्थित यमन सरकार ने इसकी जिम्मेदारी ली और कहा कि यह हमला इसलिए किया गया ताकि ईरानी विमान यमन की जमीन का इस्तेमाल न कर सके.
सना हवाई अड्डे पर हुए हमले के बाद हूती विद्रोहियों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिम में स्थित अबहा हवाई अड्डे पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने का दावा किया. उन्होंने इस हमले के बाद ये भी कहा कि ये कार्रवाई सऊदी अरब की आक्रामकता के जवाब में की गई. हूती की ओर से याह्या सरी ने अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को भी सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र से बचने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि जब तक सना हवाई अड्डे पर लगी पाबंदियां नहीं हटाई जातीं, तब तक यह चेतावनी जारी रहेगी. इसके बाद से इलाके में तनाव बढ़ गया है.
सऊदी अरब ने साल 2015 में यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक सैन्य गठबंधन बनाया था. इस इलाके के लंबे संघर्ष में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और यमन दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है. इस वक्त हूती विद्रोहियों का राजधानी सना सहित उत्तरी यमन के बड़े हिस्से और कई प्रमुख शहरों पर नियंत्रण है, जबकि यमन की सरकार अब भी देश के दक्षिणी हिस्से के बड़े क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है. साल 2022 में सऊदी के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूतियों के हमले के बाद दोनों के बीच सीजफायर हुआ था, जो काफी हद तक कायम है, लेकिन अब यह संघर्षविराम पर असर डाल सकता है.
ट्रंप-MBS का प्लान कराकर मानेगा युद्ध
एक्सियोस की रिपोर्ट में जिस तपह बताया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप, हूतियों के खिलाफ कार्रवाई में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का साथ दे रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि एमबीएस ने हूतियों के खिलाफ कार्रवाई से पहले अमेरिका का समर्थन मांगा था और ट्रंप ने उन्हें ये समर्थन दिया भी. दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर चल रहे हालात के बीच सऊदी का सारा तेल बाब अल मंदेब के रास्ते जाता है. यहां लाल सागर पर हूतियों का पहरा रहता है, ऐसे में सऊदी उन्हें किसी भी तरह से इतना ताकतवर नहीं होने देना चाहता. अगर दोनों पक्षों के बीच बवाल बढ़ता है, तो ये होर्मुज भी तनाव की जद में आ सकता है और 4 साल पहले चल रही लड़ाई एक बार फिर भड़क उठेगी.

