आगर-मालवा: ‘मां को तीन साल से लकवा है, इलाज में लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन कोई आराम नहीं मिला. अब 10 दिन में उनके हाथ-पैर में सामान्य गतिविधि दिख रही है. यह कहना है गुजरात की सोनिया की. इसी तरह 80 साल के नाहर कहते हैं, कई साल से पेट की समस्या से परेशान था, इलाज में कम से कम एक लाख रुपये लुटाए, पर राहत नहीं मिली. लेकिन, अब 9 दिन में ही फायदा दिख रहा है’. सबसे बड़ी बात है यह सब बिना दवा के हुआ है और यह चमत्कार मध्यप्रदेश के आगर-मालवा में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा भारती द्वारा संचालित प्राकृतिक चिकित्सा योग एवं अनुसंधान केंद्र (स्वास्थ्य मंदिर) में. यहां उच्च रक्तचाप (High blood pressure), मधुमेह (Diabetes), कब्ज (Constipation), गैस , (gas), एसिडिटी समेत अन्य बीमारियों का इलाज प्राकृतिक तरीके से किया जाता है. देश-विदेश से लोग यहां अपना इलाज कराने आते हैं.
9000 से अधिक साधक स्वास्थ्य लाभ ले चुके
प्राकृतिक चिकित्सा योग एवं अनुसंधान केंद्र (स्वास्थ्य मंदिर) के प्रबंधक जीवन बैरागी NDTV से बात करते हुए कहते हैं, यह संस्थान 2013 में सेवा के संकल्प के साथ शुरू हुआ था. अब तक यहां 9000 से अधिक साधक स्वास्थ्य लाभ ले चुके हैं. इनमें देश ही नहीं ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज, सिंगापुर समेत अन्य कई देश भी शामिल हैं. यहां आने वाले 95 प्रतिशत साधकों को काफी लाभ मिला है.
किस तरह की बीमारियों का होता है इलाज?
जीवन बैरागी बताते हैं कि स्वास्थ्य मंदिर में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, कब्ज, गैस, एसिडिटी, गठिया, कमर दर्द, घुटनों के दर्द, चर्म रोग और लकवा समेत अन्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों का उपचार किया जाता है. उन्हें योग, प्राणायाम, संतुलित प्राकृतिक आहार, अनुशासित दिनचर्या और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से स्वस्थ बनाने का प्रयास किया जाता है.
कैसे किया जाता है मरीज का इलाज?
प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ गिरधर पटेल बताते हैं- हमारे स्वास्थ्य केंद्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उपचार कराने के लिए आने वाले लोग यहां 10 दिन रुकते हैं. यहां आने उपचार का आधार दवाइयां नहीं, बल्कि प्रकृति की शक्ति है. मिट्टी का लेप, नीम चिकित्सा, जल चिकित्सा, मसाज थेरेपी, एक्यूपंचर और प्राकृतिक आहार जैसी पद्धतियों के माध्यम से शरीर को भीतर से स्वस्थ बनाने की कोशिश की जाती है. यहां आने वाले साधकों को यह समझाया जाता है कि रोग केवल शरीर में नहीं, बल्कि अव्यवस्थित जीवनशैली में भी जन्म लेते हैं. सबसे खास बात यह है केंद्र ‘नो प्रॉफिट-नो लॉस’ के सिद्धांत पर काम करता है. इस कारण यहां साधकों से भारी-भरकम फीस नहीं ली जाती है.
80 साल के नाहर ने खुद बताया किस बीमार से मिली राहत?
80 साल के पारस नाहर बताते हैं कि वे वर्षों से पेट में होने वाली जलन, गैस और बदहजमी से परेशान थे. अलग-अलग डॉक्टर से इलाज कराया, कम से कम एक लाख रुपये खर्च किए. लेकिन, कोई राहत नहीं मिली. स्वास्थ्य मंदिर में 10 दिन के उपचार के बाद अब बेहतर और स्वस्थ्य महसूस कर रहा हूं. साथ ही, पैसे की भी बचत हुई है.
लकवा ग्रस्त मां अब बेहतर
गुजरात के बांसवाड़ा से अपनी लकवा (paralysis) पीड़ित मां को लेकर स्वास्थ्य केंद्र में लेकर आई सोनिया कहती है उन्हें अभी 9 दिन हुए हैं. लेकिन मां के हाथ-पैर में सामान्य हलचल शुरू हो गई है. मां को पिछले 3 साल से लकवा है, कई जगह इलाज कराकर लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन कहीं कोई आराम नहीं मिला. स्वास्थ्य केंद्र के बारे में पता चला तो उन्हें लेकर आई. यहां किसी तरह की दवाएं नहीं दी जाती है, सिर्फ प्राकृतिक पद्धति से इलाज किया जाता है. विशेषज्ञ निर्देश देते हैं, जिसका पालन मरीज को करना होता है.

