मुख्य बिंदु:
- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान तेज।
- ऑपरेशन हॉट परस्यूट के तहत बड़े नक्सली नेताओं पर फोकस।
- आधुनिक तकनीक, उपग्रह और ड्रोन से फोर्स को मिल रही महत्वपूर्ण जानकारियां।
नक्सलवाद उन्मूलन के लिए ऑपरेशन हॉट परस्यूट तेज
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म करने के लक्ष्य के तहत मिशन मार्च 2026 को पूरा करने के लिए सुरक्षा बल अब ऑपरेशन हॉट परस्यूट चला रहे हैं। इस अभियान के तहत बड़े नक्सली नेताओं को सीधे निशाना बनाया जा रहा है। लड़ाई की इस रणनीति में राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) की अहम भूमिका बताई जा रही है।
सुरक्षा बल उपग्रह और ड्रोन की मदद से नक्सलियों के ठिकानों पर लगातार नजर रख रहे हैं और फिर रात के अंधेरे में अचानक हमला कर एक-एक कर शीर्ष नक्सली नेतृत्व को खत्म किया जा रहा है। फोर्स का मुख्य उद्देश्य नक्सल थिंक टैंक को पूरी तरह खत्म कर देना है, ताकि संगठन की रीढ़ टूट जाए और वह बिखर जाए।
बड़े इनामी नक्सली ढेर
इस रणनीति के तहत पिछले तीन महीनों में सात शीर्ष नक्सली समेत कुल 141 नक्सली मारे गए हैं। इनमें सेंट्रल कमेटी सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली जयराम उर्फ चलपति, स्पेशल जोनल कमेटी के 25-25 लाख के इनामी गुड्डू, सत्यम गावड़े, दामोदर, सुधीर और अब जगदीश भी शामिल हैं। इसके अलावा, पश्चिम बस्तर डिविजन कमेटी के सचिव हुंगा कर्मा को भी मार गिराया गया है।
नक्सल संगठन के अस्तित्व पर संकट
25 मार्च को दंतेवाड़ा जिले की सीमा पर अबूझमाड़ क्षेत्र में मारे गए शीर्ष नक्सली सुधीर के पास से मिले एक पत्र में यह खुलासा हुआ कि सुरक्षा बलों के आक्रामक अभियान से नक्सल संगठन के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। संगठन में नई भर्तियों पर रोक लग गई है, जबकि सक्रिय नक्सली आत्मसमर्पण और गिरफ्तारी के कारण लगातार कम हो रहे हैं, जिससे संगठन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
तकनीकी ताकत और जनसमर्थन से मजबूत हुआ अभियान
सुरक्षा बलों के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होगा। उपग्रह और ड्रोन से मिलने वाली लाइव सूचनाओं के कारण सुरक्षा बल अब अधिक प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर रहे हैं। इस रणनीति के तहत कम नुकसान में नक्सलियों को अधिक से अधिक क्षति पहुंचाने पर फोकस किया जा रहा है।
इसके साथ ही, सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में अग्रिम सुरक्षा चौकियों (एफओबी) की स्थापना कर फोर्स के प्रभाव को और बढ़ाया है।
‘नियद नेल्ला नार’ (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत राज्य सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण, पुल-पुलियों की स्थापना, स्कूल, आंगनबाड़ी, अस्पताल, राशन दुकान और बाजार जैसी सुविधाएं पहुंचा रही है। इससे नक्सलियों का जनाधार कमजोर पड़ रहा है, और स्थानीय लोग अब फोर्स के साथ जुड़ रहे हैं।
इसका उदाहरण नक्सल कमांडर हिड़मा के गांव पूवर्ती में देखा जा सकता है, जहां के ग्रामीणों का कहना है कि पहले गांव में पगडंडी तक नहीं थी, लेकिन अब बस सेवा शुरू हो चुकी है। बिजली, पानी और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलने से गांव के लोग विकास की ओर बढ़ रहे हैं और फोर्स के साथ खड़े हैं।

