चमोली : उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन सुरंग के अंदर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक तेज आवाज के साथ पानी और मलबा सुरंग में घुस आया. कुछ ही पलों में वहां काम कर रहे मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. किसी ने भागकर जान बचाई तो कोई मलबे और पानी की चपेट में आकर घायल हो गया. यह हादसा टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुआ. बताया जा रहा है कि हादसे के समय सुरंग में कुल 22 कर्मचारी मौजूद थे. रातभर चले राहत और बचाव अभियान में 19 लोगों को बाहर निकाला गया. इनमें 12 घायल और सात मृतक शामिल हैं, जबकि तीन लोग अब भी लापता हैं. इस घटना में जिंदा बचे टनल के अंदर मौजूद वर्करों ने उस वक्त के भयानक मंजर को बयां किया. उनकी बताई कहानी वाकई रोंगटे खड़ी करने वाली है.
बहुत खतरनाक स्थिति थी, संभलने का मौका ही नहीं मिला
सुरंग से सुरक्षित बाहर निकले वर्कर जगेश्वर गौड़ ने बातचीत में उस वक्त की स्थिति बताई. उनके मुताबिक सुरंग के अंदर अचानक बेहद तेज हवा आई, जैसे आंधी-तूफान आ गया हो. स्थिति इतनी अचानक बनी कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला. जगेश्वर ने बताया कि वह उस समय ऊपर की तरफ थे. जैसे ही स्थिति बिगड़ी, वह दौड़कर बाहर की ओर आए और वहां मौजूद फोरमैन को इसकी जानकारी दी. इसके बाद फोरमैन और दूसरे लोग गंभीर रूप से घायल वर्करों को बाहर निकालने के लिए अंदर गए. उन्होंने बताया कि कुछ लोग अभी भी सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं.
सरिया और गैंट्री का काम चल रहा था
जगेश्वर ने बताया कि हादसे के समय सुरंग के अंदर काम चल रहा था. वहां सरिया और गैंट्री से जुड़ा काम किया जा रहा था. यानी मजदूर रोज की तरह अपने काम में लगे हुए थे, लेकिन अचानक आई इस आपदा ने सब कुछ बदल दिया.
अचानक पानी बहुत तेजी से अंदर आया
सुरंग के अंदर काम कर रहे एक अन्य घायल वर्कर ने बताया कि अचानक पानी बहुत तेजी से अंदर आया. उसके साथ मलबा भी आया और सुरंग का हिस्सा दब गया. वर्कर ने बताया कि उसके हाथ और पैर में चोट लगी है. उसकी बातों और चेहरे पर दिख रहे डर से अंदाजा लगाया जा सकता था कि पानी कितनी तेजी से सुरंग के अंदर पहुंचा होगा. उसके मुताबिक पानी इस तरह आया, जैसे अचानक कोई बड़ा बांध फट गया हो.
एकदम पानी आया और कच्चा-कच्चा मलबा आ गया
वहीं, हिमाचल प्रदेश के चंबा के रहने वाले एक अन्य घायल वर्कर को भी सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाला गया. उन्होंने हादसे के उस पल को याद करते हुए कहा कि अचानक अफरा-तफरी मच गई. एकदम पानी आया और उसके साथ कच्चा मलबा भी सुरंग में आ गया. उनके लिए यह सब इतना अचानक था कि संभलने का समय ही नहीं मिला. कुछ ही देर पहले जहां मजदूर काम कर रहे थे, वहीं अचानक पानी और मलबे ने रास्ते बंद कर दिए.
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, हादसे में सात लोगों की मौत हुई है और 12 लोग घायल हैं. तीन लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश जारी है. मृतकों की पहचान टिहरी गढ़वाल निवासी प्रदीप पंवार (31), चमोली निवासी मुकेश सिंह, उत्तर प्रदेश निवासी दुर्गा शर्मा, विजय हंसदा और जितेंद्र कुमार, छत्तीसगढ़ निवासी लोकेश्वर और भुनेश्वर के रूप में हुई है.

