एजेंसियां—श्रीनगर, एशिया और देश की सबसे लंबी सडक़ सुरंग की खुदाई अब सिर्फ 300 मीटर बची है, जो कि अगले महीने पूरी हो जाएगी। हम बात कर रहे हैं श्रीनगर-लेह राजमार्ग स्थित जोजिला सुरंग की। परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि अब केवल 300 मीटर खुदाई का काम बचा है और काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह मई के अंत तक पूरा हो जाएगा। गौरतलब है कि 13 किलोमीटर से अधिक लंबी यह सुरंग पूरी होने के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे साल भर आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी।
13,155 मीटर है कुल लंबाई
मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संयुक्त मुख्य परिचालन अधिकारी हरपाल सिंह ने बताया कि जोजिला सुरंग की कुल 13,155 मीटर लंबाई में से केवल 300 मीटर खुदाई शेष है। हम मई के अंत या जून के पहले सप्ताह तक ब्रेकथ्रू की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह ब्रेकथ्रू तब होगा, जब दोनों छोरों, कश्मीर के बालताल और द्रास सेक्टर के मीनामार्ग से काम कर रही टीमें सुरंग के अंदर मिलेंगी। ब्रेकथ्रू के बाद बालटाल और मीनामार्ग की तरफ के लोग सुरंग के अंदर एक-दूसरे से हाथ मिलाएंगे। यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा और इससे आगे के काम आसान हो जाएंगे।
3 घंटे का सफर सिर्फ 15 मिनट में
दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में से एक में बनायी जा रही यह सुरंग भारत की सबसे लंबी सडक़ सुरंग और दोनों दिशाओं से आवाजाही के लिए बनने वाली एशिया की सबसे लंबी सुरंग बनने वाली है। इससे सोनमर्ग और द्रास के बीच यात्रा का समय लगभग तीन घंटे से घटकर करीब 15 मिनट रह जाने की उम्मीद है। अधिकारियों ने कहा कि हालांकि खुदाई का काम 2026 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन पूरी परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य फरवरी 2028 रखा गया है।
हर मौसम में आवाजाही
जोजिला सुरंग का अत्यधिक रणनीतिक और आर्थिक महत्व है। यह लद्दाख के लिए निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करेगी, जो भारी बर्फबारी के कारण हर साल कई महीनों तक देश से कटा रहता है। बेहतर पहुंच से पर्यटन, व्यापार और रक्षा रसद (लॉजिस्टिक्स) को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में जोजिला पर यातायात पूरी तरह से मौसम पर निर्भर है, जहां सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और लगातार भूस्खलन के कारण मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है।

