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    Home»राष्ट्रीय»“लोगों को हमारे फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है”- सुप्रीम कोर्ट
    राष्ट्रीय

    “लोगों को हमारे फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है”- सुप्रीम कोर्ट

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMarch 21, 2026
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    कानून
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    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें एनसीईआरटी की कक्षा 8 की पुरानी सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से फैसलों के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा, किसी फैसलें के बारे में अपनी राय जाहिर करना गलत नहीं है। सीजेआइ सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की बेंच इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में 8वीं की पुरानी सामाजिक विज्ञान की किताब में लिखी इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई गई थी कि ‘हाल के फैसले झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वालों को शहर में अतिक्रमणकारी के तौर पर देखा जाता है’।

    सीजेआइ ने कहा, यह किसी फैसलेे के बारे में एक नजरिया है। यह एक स्वस्थ आलोचना है। न्यायपालिका को इस बारे में ज्यादा संवदेनशील क्यों होना चाहिए? किताब का यह बताता है कि न्यायपालिका की बनावट कैसी है, वह कैसे काम करती है? लोगों को हमारे फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है। सीजेआइ ने कहा, किसी अदालती फैसले के बारे में लोगों की राय सही या गलत हो सकती है। अदालत ने याचिका को खारिज करते कहा कि अब इसका कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यह पुस्तक सिर्फ 2015-16 के शैक्षणिक सत्र में थी।

    विवादित अध्याय की समीक्षा करेगी विशेषज्ञ समिति

    केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि कक्षा 8 में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े अध्याय की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। समिति में पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, पूर्व जज इंदु मल्होत्रा और पूर्व जस्टिस अनिरुद्ध बोस समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। यह समिति अध्याय की समीक्षा कर नया मसौदा तैयार करेगी।

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