चेन्नेई: तमिलनाडु के चेंगलपेट जिले के कोलापक्कम गांव में एक सरकारी राशन की दुकान अब सिर्फ अनाज बांटने की जगह नहीं रही। राशन की यह दुकान अब पढ़ाई और सामाजिक बदलाव का केंद्र भी बन गई है। राशन की दुकान में बनाई गई छोटी-सी लाइब्रेरी आज बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए ज्ञान का नया ठिकाना बन चुकी है। इस अनोखी पहल की शुरुआत राशन दुकान के प्रभारी वेलु चिन्नासामी ने की। उन्होंने दुकान संभालने के बाद तय किया कि यहां आने वाले लोग केवल राशन लेकर ही न जाएं, बल्कि उन्हें सीखने और पढ़ने का भी अवसर मिले।
अब कैसी दिखती है राशन की यह दुकान
दुकान में लाइब्रेरी बनाने से पहले चिन्नासामी ने सबसे पहले दुकान के आसपास फैली गंदगी और शराब की खाली बोतलें हटाई। इसके बाद दुकान पर शेड, बैठने के लिए कुर्सियां, पंखे, पीने के पानी की व्यवस्था और पढ़ने के लिए एक शांत हिस्सा तैयार किया गया। इसी के साथ ‘तिरुवल्लुवर नूलगम’ नाम से एक सामुदायिक लाइब्रेरी की स्थापना की गई। इस पहल में पूरे गांव ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। स्थानीय पेंटर कुमारेशन ने किताबें दान कीं और लाइब्रेरी की दीवारों को आकर्षक बनाया। उनका कहना है कि वह खुद पढ़ाई पूरी नहीं कर सके, लेकिन अगर उनकी दी हुई किताबें किसी छात्र का भविष्य संवार दें तो इससे बड़ी खुशी उनके लिए कोई नहीं होगी।

