Indian Share Market News : भारतीय शेयर बाजार आज हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारी बढ़त के साथ खुला है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 654 अंक की बढ़त के साथ 77,395.63 पर खुला। शुरुआती कारोबार में 9 बजकर 30 मिनट पर यह 0.93 फीसदी या 701 अंक की बढ़त के साथ 77,442 पर ट्रेड करता दिखा। इस समय सेंसेक्स पैक के 30 शेयरों में से 28 शेयर हरे निशान पर और 2 शेयर लाल निशान पर ट्रेड करते दिखे। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी इस समय 0.90 फीसदी या 212 अंक की बढ़त के साथ 24,171 पर ट्रेड करता दिखाई दिया।
इन सेक्टर्स के शेयरों में आई तेजी
सेक्टोरल सूचकांकों की बात करें, तो शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक तेजी निफ्टी आईटी में 1.57 फीसदी, निफ्टी मेटल में 1.55 फीसदी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.34 फीसदी देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो में 0.94 फीसदी, निफ्टी एफएमसीजी में 0.34 फीसदी, निफ्टी मीडिया में 0.79 फीसदी, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.94 फीसदी, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 1.17 फीसदी, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1.01 फीसदी और निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में 1.24 फीसदी की तेजी देखने को मिली। इससे इतर निफ्टी फार्मा में 0.30 फीसदी और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में 0.26 फीसदी की गिरावट दिखाई दी।
क्यों आई बाजार में आज तेजी?
TCS ने की तिमाही नतीजों की दमदार शुरुआत
टीसीएस ने अप्रैल-जून तिमाही में 13,349 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 5 फीसदी ज्यादा है। एक साल पहले कंपनी का मुनाफा 12,760 करोड़ रुपये था। कंपनी की परिचालन आय भी सालाना आधार पर लगभग 14 फीसदी बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। पिछले वर्ष इसी तिमाही में यह 63,437 करोड़ रुपये थी। वहीं, पहली तिमाही में कंपनी का टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 9.5 अरब डॉलर रहा। बाजार की उम्मीदों के मुताबिक आए इन नतीजों के बाद नुवामा, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज समेत कई ब्रोकरेज हाउस ने शेयर पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। कुछ ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा स्तर से इसमें 46 फीसदी तक की तेजी की संभावना बन सकती है।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिला मजबूत सपोर्ट
घरेलू बाजार को विदेशी बाजारों से भी अच्छे संकेत मिले हैं। शुक्रवार सुबह एशियाई बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 5 फीसदी चढ़कर बेयर मार्केट से बाहर निकल गया। जापान का निक्की और हांगकांग का हैंगसेंग करीब 2-2 फीसदी मजबूत रहे, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट भी लगभग 1 फीसदी ऊपर कारोबार करता दिखा। अमेरिका में भी टेक शेयरों की खरीदारी से नैस्डैक एक फीसदी से ज्यादा चढ़ा। यूरोप में फ्रांस का CAC और जर्मनी का DAX भी मजबूत बंद हुए, जबकि ब्रिटेन का FTSE मामूली कमजोरी के साथ बंद हुआ।
ईरान-अमेरिका तनाव के बावजूद बाजार शांत
मिडिल ईस्ट में हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं, दक्षिणी ईरान के कई इलाकों, जिनमें परमाणु संयंत्र वाला बुशेहर भी शामिल है, वहां विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं से फिर यह आशंका बढ़ी है कि दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट पर असर पड़ सकता है। युद्ध से पहले दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती थी।
इन बदलती परिस्थितियों के बावजूद वैश्विक शेयर बाजारों में घबराहट नहीं दिख रही है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि मिडिल ईस्ट का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन बाजार फिलहाल इन नकारात्मक खबरों को ज्यादा महत्व नहीं दे रहा। फिर भी निवेशकों को हालात पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।
कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट
शुक्रवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 76 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। हालांकि, इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर खत्म होने से जुड़े बयान के बाद तेल में तेजी आई थी, लेकिन कीमतें फिर नीचे आ गईं। गौर करने वाली बात यह है कि साल की शुरुआत में जब युद्ध अपने चरम पर था, तब ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया था। मौजूदा स्तर उससे काफी नीचे है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को राहत मिल रही है।
बदल रहा विदेशी निवेशकों का रुख
गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 533 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। लेकिन केवल एक दिन के आंकड़े से तस्वीर पूरी नहीं बनती। 1 जुलाई से 8 जुलाई के बीच लगातार छह कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 8,280 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर फिर मजबूत होता दिख रहा है।

