सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) और ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) की कार्रवाई लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रही। तेंदूपत्ता बोनस घोटाले से जुड़े मामले में दोनों एजेंसियों ने कोंटा के बाद अब दोरनापाल में वन विभाग के कर्मचारियों के आवासों पर छापेमारी की। इसके साथ ही जिला मुख्यालय सुकमा में भी वन विभाग के एक प्रबंधक के घर पर जांच टीम ने दबिश दी।
शुक्रवार सुबह सात ठिकानों पर छापेमारी
शुक्रवार सुबह ईओडब्ल्यू और एसीबी की संयुक्त टीमों ने कुल सात स्थानों पर छापे मारे। यह कार्रवाई 2021-22 के दौरान तेंदूपत्ता बोनस वितरण में हुई अनियमितताओं को लेकर की जा रही है। जांच के दौरान दस्तावेज, रिकॉर्ड और सबूत जुटाए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 8 मार्च को सुकमा डीएफओ अशोक पटेल के निवास पर भी छापा डाला गया था। आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनकी निशानदेही पर अब यह बड़ी कार्रवाई की जा रही है।
7 करोड़ के घोटाले में गुरुवार को 12 ठिकानों पर कार्रवाई
करीब सात करोड़ रुपये के तेंदूपत्ता बोनस घोटाले की जांच के तहत गुरुवार को भी एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीमों ने जिले में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई पूर्व विधायक व सीपीआई नेता मनीष कुंजाम, लघु वनोपज समिति के प्रबंधकों और वन विभाग के कर्मचारियों के 12 ठिकानों पर की गई थी।
वन कर्मचारी के घर से मिला 26.63 लाख नकद
गुरुवार को मनीष कुंजाम के सुकमा और रामाराम स्थित निवासों पर एक साथ छापा मारा गया था। शाम तक चली इस कार्रवाई में जांच एजेंसियों को दस्तावेज, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, बैंक खाते और निवेश से संबंधित कागजात के साथ 26 लाख 63 हजार 700 रुपये की नकद राशि बरामद हुई। यह रकम वनमंडलाधिकारी कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी राजशेखर पुराणिक के घर से मिली।
निलंबन और आरोपों का दौर
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान 2021-22 में तेंदूपत्ता संग्राहकों को दी जाने वाली बोनस राशि के गबन का यह मामला सामने आया था। इस मामले में नामजद वनमंडलाधिकारी अशोक कुमार पटेल को राज्य सरकार ने फरवरी में निलंबित कर दिया था। दूसरी ओर, मनीष कुंजाम ने दावा किया है कि वे ही इस घोटाले के पहले शिकायतकर्ता हैं और प्रदेश सरकार उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है।

