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    Home»धर्म आस्था»झील के बीचों-बीच है दुनिया का सबसे ऊंचा युल्ला कांडा श्रीकृष्ण मंदिर
    धर्म आस्था

    झील के बीचों-बीच है दुनिया का सबसे ऊंचा युल्ला कांडा श्रीकृष्ण मंदिर

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 23, 2026
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    भारत को मंदिरों की पवित्र भूमि कहा जाता है, जहां देश के एक छोर से दूसरे छोर तक विभिन्न देवी-देवताओं के लाखों मंदिर मौजूद हैं. उन्हीं में से एक देवभूमि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित ‘युल्ला कांडा मंदिर’ है, जो भगवान कृष्ण को समर्पित है. इसे दुनिया का सबसे ऊंचा पर स्थित श्रीकृष्ण मंदिर का दर्जा प्राप्त है. यह एक झील के बीच हैं, जहां पर जाने वाले भक्त अपनी किस्मत का पता किन्नौरी टोपी से लगाते हैं. आइए जानते हैं युल्ला कांडा श्रीकृष्ण मंदिर के बारे में.

    दुनिया का सबसे ऊंचा श्रीकृष्ण मंदिर

    युल्ला कांडा दुनिया का सबसे ऊंचा श्रीकृष्ण मंदिर है, जो एक पवित्र झील के बीचों बीच प्रकृति की गोद में स्थित है. मंदिर की ऊंचाई लगभग 12,000 से 14,000 फीट के बीच मानी जाती है.

    पांडवों ने किया था मंदिर का निर्माण

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान किया था. मंदिर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और ट्रैक के लिए प्रसिद्ध है, जो बर्फ से ढकी चोटियों, हरे-भरे जंगलों और शांत परिदृश्यों से होकर गुजरती है.

    युल्ला कांडा श्रीकृष्ण मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को युल्ला नामक एक गांव से 12 किलोमीटर का ट्रैक करना पड़ता है. पहाड़ी इलाके में होने की वजह से मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय मई से सितंबर का माना जाता है, जब मौसम सुहावना होता है.

    जन्माष्टमी पर लगता है मेला

    युल्ला कांडा श्रीकृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी का त्योहार बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यहां पारंपरिक तरीके से भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है. इस खास दिन विशेष मेले का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें दूर-दराज से तीर्थयात्री भगवान कृष्ण के दर्शन करने के लिए आते हैं.

    किन्नौरी टोपी से जानें अपना भाग्य!

    एक स्थानीय परंपरा युल्ला कांडा मंदिर को और भी खास बनाती है. मान्यता है कि मंदिर की झील में टोपी बहाने से भक्तों के भाग्य का पता चलता है. इसके लिए मंदिर में पहुंचे भक्त किन्नौरी टोपी को झील में डालते हैं और मान्यता है कि अगर टोपी पानी में डूबे बिना झील के दूसरी ओर तैरते हुए चली जाती है, तो भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है. वहीं, अगर टोपी डूब जाती है, तो आगे आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. आपके जीवन में मुश्किलें आ सकती हैं.

    मंदिर से जुड़ी मान्यताएं

    इसके अलावा मंदिर को लेकर एक यह भी मान्यता है कि युल्ला कांडा श्रीकृष्ण मंदिर आने वाले जो भक्त झील की परिक्रमा सच्ची श्रद्धा और पूरी निष्ठा के साथ करते हैं, उनके सारे पाप धुल जाते हैं और उन्हें प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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