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    Home»राष्ट्रीय»TMC के बागी सांसदों को SC ने जारी किए नोटिस
    राष्ट्रीय

    TMC के बागी सांसदों को SC ने जारी किए नोटिस

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inAugust 25, 2026
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    नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करने की मंगलवार को सहमति जताई, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पार्टी के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। तृणमूल कांग्रेस के इन असंतुष्ट सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) की सदस्यता ले ली है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर 20 सांसदों को नोटिस जारी किया।

    शीर्ष अदालत ने इस बात पर गौर करने के बाद लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और महासचिव को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उनकी ओर से पेश हो रहे हैं। शीर्ष अदालत के समक्ष इसी तरह की एक अन्य याचिका भी लंबित है, जिसे शिवसेना (उबाठा) ने दायर किया है। इस याचिका में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों के विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी दिए जाने को चुनौती दी गई है।

    न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही है। अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में 20 सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर कथित तौर पर फैसला लेने में हो रही देरी को चुनौती दी है। अपनी याचिका में तृणमूल नेता ने अनुरोध किया है कि लोकसभा अध्यक्ष को संविधान में निहित दल-बदल रोधी प्रावधानों के तहत अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर फैसला लेने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने इससे पहले 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं और लोकसभा अध्यक्ष से इनका जल्द निपटारा करने का आग्रह किया था।

    खबरों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी ने 27 जुलाई को फिर से पत्र भेजने के बाद इस मुद्दे पर 12 अगस्त को ओम बिरला से मुलाकात भी की थी। यह विवाद तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में उस समय पैदा हुआ, जब उसके 20 लोकसभा सदस्यों ने घोषणा की कि वे त्रिपुरा आधारित राजनीतिक संगठन ‘एनसीपीआई’ में शामिल हो गए हैं या उसका हिस्सा बन गए हैं। बागी सांसदों ने लोकसभा में अपने लिए अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग भी की थी। इसके बाद इन बागी सांसदों को संसद में एनसीपीआई का समूह माना गया और उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की संसदीय गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि ये सभी सांसद उसके चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुए थे और किसी दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जुड़ने का उनका फैसला पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के बराबर है।

    पार्टी के अनुसार, ऐसे में संविधान के दल-बदल रोधी कानून के तहत उन्हें अयोग्य करार दिया जाना चाहिए। वहीं, बागी सांसदों का कहना है कि उनका कदम वैध विलय के दायरे में आता है। याचिका में लोकसभा अध्यक्ष और महासचिव के अलावा उन 20 सांसदों को भी प्रतिवादी बनाया गया है, जिनके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में नामित सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, पार्थ भौमिक, अरूप चक्रवर्ती, अधिकारी दीपक देव, सायनी घोष, बापी हलदर, मोहम्मद अबू ताहेर खान, कालीपद सरेन खेरवाल, असित कुमार मल, जून मालिया, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, माला रॉय, शर्मिला सरकार और यूसुफ पठान शामिल हैं। 

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