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    Home»अंतर्राष्ट्रीय»PoK में विरोध को दबाने दूध और दवाइयों की सप्लाई रोकी, मुश्किल में लोग ‘नीचता’ पर उतरे शहबाज-मुनीर
    अंतर्राष्ट्रीय

    PoK में विरोध को दबाने दूध और दवाइयों की सप्लाई रोकी, मुश्किल में लोग ‘नीचता’ पर उतरे शहबाज-मुनीर

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJune 25, 2026
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    इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। पीओके के लोग दो हफ्ते से ज्यादा समय से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं। शहबाज शरीफ की सरकार आर्मी चीफ असीम मुनीर किसी भी सूरत में इस विरोध को दबाने की कोशिश में हैं। आम लोगों पर बल प्रयोग और गोली चलाने के बाद पाक सरकार पर आरोप है कि वह प्रदर्शनकारियों को झुकाने के लिए खाने-पीने की चीजों, ईंधन और दवाओं की सप्लाई रोक रही है।

    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों, ट्रक ड्राइवरों और विपक्षी नेताओं ने स्थानीय मीडिया को बताया है कि जरूरी सामान ले जाने वाले वाहनों को पीओके के प्रदर्शनों से प्रभावित इलाके में घुसने से रोका जा रहा है। पाकिस्तानी अधिकारी किसी तरह की नाकेबंदी करने से इनकार करते हैं लेकिन स्थानीय लोगों से पता चलता है कि हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

    आम जीवन पटरी से उतरा

    जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे शटडाउन (बंद) की वजह से पहले से ही पीओके में आम लोगों के सामने संकट हैं। सरकार के ब्लॉकेड की वजह रोजमर्रा की चीजों की कमी और गंभीर हो गई है। ऐसे में पीओके में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित है और सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है।

    कई इलाके में ना सिर्फ खाने पीने की चीजें बल्कि ईंधन की भी भारी कमी है। पुंछ और मुजफ़्फराबाद जैसे बड़ों जिलों में अक्सर पेट्रोल पंप बंद देखे जा रहा हैं। वाहन चालकों को ब्लैक मार्केट से ईंधन खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं इंटरनेट का ना होना लोगों की परेशानी को और ज्यादा बढ़ा रहा है।

    मुजफ़्फराबाद में लोगों को जरूरी चीजे पाने में मुश्किल हो रही है। मुझे तो दवा तक नहीं मिल पा रही है क्योंकि ज्यादातर दवा की दुकानें बंद हैं। मैं हर जगह दवा ढूंढ़ रहा हूं लेकिन बड़ी दुकानें भी बंद हैं।

    स्थानीय निवासी मुहम्मद मस्कीन

    ‘आटा तक नहीं मिल रहा है’

    नीलम जिले के निवासी अलिफ दीन ने बीबीसी उर्दू को बताया कि हड़ताल शुरू होने के बाद से इलाके के लोगों को राशन नहीं मिल रहा है। मैं खुद 15 दिनों से डिपो में पैसे जमा कर रहा हूं लेकिन मुझे अभी तक आटा नहीं मिला है। स्थानीय बाजारों में जो आटा मिल रहा है, उसकी कीमत हालिया दानों में काफी बढ़ गई है।

    अब्बासपुर और रावलकोट के निवासियों ने भी संकट की बात स्वीकारी है। यहां के निवासनियों का कहना है कि इस कमी की कुछ वजह JAAC की हड़ताल है, जिसके कारण पूरे इलाके में दुकानें और बाजार बंद करने पड़े हैं। दूसरी ओर में जरूरी सामान ले जाने वाले ट्रकों को अधिकारियों को रोकने की कोशिश ने भी संकट को गंभीर बना दिया है।

    मैंने पुलिस से बहुत मिन्नतें कीं कि मुझे घर खाना-पीना ले जाने दें लेकिन पुलिस को कोई परवाह नहीं थी। उन्होंने कहा कि आप खाना-पीना और दवाइयां फेंक देंगे तो आपको जाने दिया जाएगा। इस रवैये ने स्थिति को नाजुक कर दिया है।

    नवीद (स्थानीय निवासी)

    पीटीआई ने लगाए गंभीर आरोप

    पाकिस्तान की मुख्य विपक्षी पार्टी पीटीआई ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर पीओके में जरूरी सामान पहुंचने से रोकने का आरोप लगाया है। पार्टी कहा है कि आजाद पट्टन समेत कई रास्तों पर यात्रियों को रोका जा रहा है। उन्हें खाना, पीने का पानी और दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। इस तरह की पाबंदियां एक बुरी मिसाल कायम करती हैं।

    पीओके में हालिया अशांति की शुरुआत विधानसभा की उन 12 सीटों को लेकर हुए विवाद से शुरू हुई है, जो कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। स्थानीय समूहों का आरोप है कि इस्लामाबाद इन सीटों का इस्तेमाल चुनावों को प्रभावित करने और अपनी बात मानने वाली सरकारें बनाने के लिए करता है।

    भड़क सकता है विरोध

    पाकिस्तान सरकार ने JAAC को बैन कर दिया है लेकिन उसके नेतृत्व वाला आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है। खासतौर से रावलकोट में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं। पीओके की कथित राजधानी मुजफ़्फराबाद में भी हजारों लोगों ने मार्च निकालकर आंदोलन तेज करने की धमकी पाकिस्तानी सरकार को दी है।

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