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    Home»लेख-आलेख»अमरीका का ट्रम्प कार्ड और पाक…
    लेख-आलेख

    अमरीका का ट्रम्प कार्ड और पाक…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 17, 2026
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    अगर कहा जाए कि मौजूदा अमरीका के पास ‘ट्रम्प कार्ड’ है जो कब चल दे, कोई नहीं जानता, तो गलत नहीं होगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का तल्खी भरा कहें या दर्द भरा बयान यही बताता है। गत दिवस वह नैशनल असैंबली में अमरीका की पाकिस्तान के प्रति भूमिका पर बोलते समय कुछ ऐसा बोल गए, जिसकी चर्चा इन दिनों पूरी दुनिया में है। उन्होंने कहा कि अमरीका ने पाकिस्तान का अपने सामरिक हितों के लिए हमेशा इस्तेमाल किया, उसके बाद टॉयलैट के पेपर जैसा छोड़ दिया। निश्चित रूप से इतना तो समझ आता है कि भारत के साथ हुई ट्रेड डील के बाद पाकिस्तान में बेचैनी जरूर दिख रही थी। अन्दरूनी तौर पर पाकिस्तान इतना घबराया हुआ और परेशान होगा, यह लगता नहीं था।

    अमरीका ने इस्लाम को इस्लाम के खिलाफ खड़ा कर अपना मतलब साध लिया और स्वार्थी पाकिस्तान समझते हुए भी अनजान बना रहा। जब भारत से अमरीका की चंद दिनों पहले की नजदीकी समझ आई तो दर्द छलकने लगा। पाकिस्तान अच्छे से समझता था कि अफगानिस्तान की जमीन पर लड़े गए दो युद्ध न तो इस्लाम के हित में थे न ही मजहब से प्यार करने वालों के। हकीकत में ये दुनिया का दारोगा कहलाने वाले अमरीका के स्वार्थ से जुड़े थे, जो वास्तव में एक सुपरपावर की रणनीतिक जंग थी। निश्चित रूप से अब लगने लगा है कि पाकिस्तान-अमरीका के बीच मुनीर और शहबाज शरीफ के चापलूसी भरे रिश्ते पर भी अमरीकी राष्ट्रपति का ट्रम्प कार्ड चल गया है। खिसियाए पाकिस्तान और उसके रक्षा मंत्री के बयान के बाद, अब अंतर्राष्ट्रीय मायने चाहे जो निकाले जाएं लेकिन यह समझ आने लगा है कि पाकिस्तान की स्थिति ‘उगलत लीलत पीर घनेरी’ जैसी हो गई है, जाए तो जाए कहां? हालांकि ख्वाजा आसिफ अब मानते हैं कि पाकिस्तान ने सोवियत संघ के खिलाफ और 2001 के बाद अमरीका के नेतृत्व वाले युद्धों में भाग लिया था जो धार्मिक जेहाद कतई नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह राजनीतिक लाभ और दुनिया की बड़ी शक्तियों का समर्थन प्राप्त करने बाबत था।

    आर्थिक रूप से टूट चुके और एक तरह से आंतरिक युद्ध के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान को पहले ही समझना था कि ज्यादा मिठास में कीड़े पड़ जाते हैं। बहरहाल मौजूदा दौर में पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ट्रम्प की चापलूसी कर-कर के बनाए गए संबंधों में न केवल कड़वाहट आ रही, बल्कि कीड़े भी पड़ रहे हैं। शायद पाकिस्तान यह भूल गया है कि अच्छा पड़ोसी उसका सही हितैषी होता है। लेकिन उसने तो शुरू से भारत को अपना दुश्मन मान रखा था, जिसके नतीजे अब दुनिया देख रही है कि पाकिस्तान खुद ही अपने बुने जाल में फंस कर कैसे फडफ़ड़ा रहा है। पाकिस्तान की बौखलाहट इसी से समझ आती है कि उसके मौजूदा हुक्मरान खुद ही अपनी पोल खोल रहे हैं। अब आसिफ द्वारा की गई आलोचना उनकी छाती पीटने वाली मानसिक स्थिति जैसी है। वे इतने परेशान और व्यग्र हैं कि पूर्व सेना प्रमुखों जनरल जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ की खुलकर आलोचना करते हुए यह कहने से भी नहीं हिचकते कि दोनों ने अमरीका को अफगानिस्तान युद्ध के लिए अपना पोर्ट और एयरस्पेस देकर दोगलई की। दोनों ने इस लड़ाई की खातिर अपनी रीति-नीति भी बदल दी, जिसे आज पाकिस्तान भुगत रहा है।

    अब आसिफ को अफगानिस्तान की तबाही याद आने के साथ-साथ खुद की गलतियां भी नजर आने लगी हैं, जिसके चलते न केवल लाखों लोग प्रभावित हुए, तबाह हुए, बल्कि पीढिय़ां भी बर्बाद हुईं। वे इसे पाकिस्तान का ‘यूज एंड थ्रो’ बताते हुए यहां तक कहते हैं कि हकीकत में यह किराए का एक युद्ध था, जिसमें पाकिस्तान का अमरीका ने अपने सामरिक हितों के लिए खासा इस्तेमाल किया और मतलब निकलते ही छोड़ दिया। यकीनन टुकड़े फैंक कर पाकिस्तान का इस्तेमाल किया गया।

    क्या यह सब भारत के साथ हुई डील के बाद पाकिस्तान को समझ आया? पाकिस्तान जब झोली लेकर भीख मांगते हुए अमरीका के सामने खड़ा होता था, तब यह पुरानी बातें याद क्यों नहीं रहती थीं? जब तक उसकी झोली में अमरीकी डॉलर बतौर भीख आते रहे तो मुंह बंद रहता था। तब भी क्या पाकिस्तान इतना अनजान था? अमरीका की भारत के प्रति नरमी कहें या नए व्यावसायिक क्षेत्र में साथ आने का इशारा, उससे भी पाकिस्तान परेशान है। इधर अमरीका ने दक्षिण एशिया और पश्चिमी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, जो ङ्क्षहद महासागर और प्रशांत महासागर को जोडऩे वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री और भू-राजनीतिक क्षेत्र है और अफ्रीका के पूर्वी तट से अमरीका के पश्चिमी तट तक फैला है, को लेकर जैसे ही भारत को भरोसेमंद सहयोगी बताया, पाकिस्तान को मानो सांप सूंघ गया। पाकिस्तान को डर क्यों लगा क्योंकि यह विश्व का सबसे बड़ा व्यापारिक मार्ग और 65 प्रतिशत आबादी वाला क्षेत्र है, जो आॢथक, सामरिक और सुरक्षा दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    अब पाकिस्तान के हुक्मरानों को अपनी एक-एक गलती याद आ रही है। उसके कई नेता इस बात पर छाती पीटते दिख रहे हैं कि अफगानिस्तान किन नीतियों से तबाह हुआ! अब वहां संसद में खुलेआम स्वीकारा जा रहा है कि दुनिया अनजान बनकर नहीं रह सकती। निश्चित रूप से पाकिस्तान-अमरीका संबंध एक खतरनाक मोड़ पर हैं। देर आयद दुरुस्त आयद का अलाप पाकिस्तान कब तक अलापेगा और इससे होगा क्या? दुनिया जानती है कि डोनॉल्ड ट्रम्प बतौर ट्रम्प कार्ड कब कौन सी चाल चल जाएं, कोई नहीं जानता!-ऋतुपर्ण दवे

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