कॉकरोच जनता पार्टी , ये कैसा नाम हुआ। नाम है और पार्टी भी। सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा है और बड़े-बड़े नेता इसे ज्वाइन भी कर रहे हैं! मगर ये नाम सुनते ही मन में ढेरों सवाल आते हैं कि आखिर ये पार्टी करेगी क्या, इसे शुरू किसने किया है और इसका मकसद क्या है। चलिए सब जानते हैं।
CJI का बयान
कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेरोजगारों को कॉकरोच बता दिया था। उनका मानना था कि ऐसे युवा नौकरी में कुछ खास नहीं बन पाते हैं। बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई भी दी थी कि उन्होंने ऐसा फर्जी डिग्रीवालों के लिए कहा था। लेकिन ट्रोलर्स कहां मानने वाले थे। उन पर अभी भी मीम बन रहे हैं।
क्या है कॉकरोच जनता पार्टी
ये असल में राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि X का एक हैंडल है जो राजनीतिक व्यंग के तौर पर सोशल मीडिया का ध्यान खींच रहा है। इसके बायो में बताया गया है कि यह युवाओं का राजनीतिक मोर्चा है। यह युवाओं के लिए और युवाओं द्वारा वाली सोच पर काम करता है। क्योंकि ये हैंडल CJI के बयान के बाद बनाया गया है इसलिए इसे इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस पार्टी को ज्वाइन करने की योग्यता
इस पार्टी को ज्वाइन करने की योग्यता भी खास है। इसके लिए अपको बेरोजगार होना चाहिए और आलसी भी। आप कम से कम 11 घंटे ऑनलाइन रह लेते हों तो ये पार्टी आपको सदस्य बना लेगी। हालांकि फिलहाल इसे TMC सांसद मोइना मित्रा और कीर्ति आजाद जैसे बड़े राजनीतिज्ञों का सपोर्ट मिल गया है। उन्होंने इसे फॉलो कर लिया है।
24 घंटे में 10000 फॉलोअर्स
इस पार्टी के व्यंग लोगों को पसंद आ रहे हैं, इसका सबूत है सिर्फ 24 घंटे में हुए 10000 फॉलोअर्स। फिलहाल, इस हैंडल पर 33000 फॉलोअर्स हो चुके हैं। जिन्हें ये कॉकरोच ही कहते हैं!
अभिजीत दीपके कौन हैं?
किसी भी राजनीतिक दल या आंदोलन के लिए एक नेता बहुत ज़रूरी होता है. अभिजीत दीपके आख़िर कौन हैं?
इस सवाल पर वो कहते हैं, “मैं महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर से हूं. ग्रैजुएशन के लिए मैं पुणे गया. इसके बाद मुझे कुछ सालों के लिए आम आदमी पार्टी के साथ काम करने का मौक़ा मिला जहां मैं उनकी कम्युनिकेशन टीम में था.”
“मैं उनके स्वास्थ्य और शिक्षा पर काम करने की वजह से उनसे आकर्षित था. ये कुछ नया था जो पहली बार भारतीय राजनीति में हो रहा था. जैसे आज कॉकरोच जनता पार्टी नई है, ऐसा ही मुझे लगा कि वो कुछ नया बदलाव लाने जा रहे हैं. मैंने कुछ समय के लिए उनके साथ काम किया फिर मुझे लगा मुझे और पढ़ने की ज़रूरत है और मैं घर पर मास्टर्स की तैयारी करने लगा. मुझे बोस्टन यूनिवर्सिटी से बुलावा आया. मैं दो साल से यहां पर हूं और अपनी ग्रैजुएशन पूरी की है.”
कॉकरोच जनता पार्टी का घोषणापत्र काफ़ी ध्यान खींचने वाला है. इस पर अभिजीत कहते हैं, “मुझे लगता है कि घोषणापत्र इस समय भारत के लोकतंत्र और वर्तमान राजनीतिक स्थिति के बारे में बताता है. हम लगातार देख रहे हैं कि वो जज जिन्हें निष्पक्ष रहना होता है, जिनका सरकार से कुछ लेना-देना नहीं होना चाहिए वो रिटायरमेंट के बाद सरकार से लाभ ले रहे हैं. ये बहुत ख़तरनाक है क्योंकि न्यायपालिका को स्वतंत्र रहना होता है. अगर न्यायपालिका भी सरकार की राह पर चलेगी तो फिर क्या रह जाएगा. फिर लोकतंत्र को कौन बचाएगा.”
“दूसरी बात महिला के प्रतिनिधित्व को लेकर है. मैं बचपन से सुनता आया हूं कि महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण मिलेगा लेकिन आज तक ये नहीं हुआ. अगर महिलाओं को आरक्षण देना है तो उन्हें 50 फ़ीसदी आरक्षण दीजिए.”

