मुख्य बिंदु:
- महुआ बीनने जंगल गई महिला आईईडी विस्फोट की चपेट में आई।
- 2004 से अब तक आईईडी धमाकों में 7 ग्रामीणों की जान गई।
- प्रेशर आईईडी की वजह से 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
नक्सलियों की कायराना हरकत फिर आई सामने
नक्सलियों द्वारा बिछाए गए प्रेशर आईईडी की चपेट में आने से एक ग्रामीण महिला की रविवार शाम मौत हो गई। उसूर की सुशीला सोढ़ी (सोढ़ीपारा) महुआ बीनने के लिए बोत्तामरका पहाड़ी जंगल में गई थीं। शाम करीब 5:30 बजे आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उसूर ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
नक्सली सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए आईईडी प्लांट करते हैं, लेकिन इसकी चपेट में निर्दोष ग्रामीण और मवेशी आ जाते हैं। महिला की दर्दनाक मौत के बाद उसूर में मातम पसरा हुआ है।
ग्रामीणों में दहशत, जंगल जाने से डर रहे लोग
शनिवार को बोड़गा की सरस्वती ओयाम भी प्रेशर आईईडी धमाके में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। महुआ बीनते समय वह पेड़ के पास से गुजर रही थीं, तभी विस्फोट हुआ। उन्हें इलाज के लिए जगदलपुर रेफर किया गया है।
प्रेशर आईईडी से 2004 से अब तक 7 की मौत
2004 से अब तक नक्सलियों के आईईडी विस्फोटों में 7 निर्दोष ग्रामीणों की जान जा चुकी है, जबकि 6 ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए हैं। नक्सलियों की इन कायराना हरकतों के कारण कभी बुजुर्ग मां-बाप अपने सहारे को खो देते हैं, तो कभी मासूमों के सिर से माता-पिता का साया उठ जाता है। सवाल यह है कि आखिर कब तक आम लोग नक्सली हिंसा का शिकार होते रहेंगे?

