चेन्नई: तमिलनाडु की खाली हुई पांच विधानसभा सीटों पर फिलहाल उपचुनाव नहीं होंगे। मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य की उन पांच विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने की अधिसूचना जारी करने पर रोक लगा दी, जहां अप्रैल 23 को हुए विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों ने इस्तीफा दे दिया था। इन पांच सीट में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की तिरुचिरापल्ली (पूर्व) विधानसभा सीट भी शामिल है। दरअसल 4 मई को तमिलनाडु चुनाव रिजल्ट आने के बाद AIADMK के कई विधायकों ने एक-एक करके अपने विधायी पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे सत्ताधारी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ में शामिल हो गए। इन कदमों के पीछे हॉर्स-ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने गंभीर आरोप लगाए हैं और उपचुनाव कराने पर रोक लगाने की मांग करते हुए मुकदमे दायर किए हैं।
कब होगी अगली सुनवाई?
मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एस. ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की बेंच ने उपचुनाव पर रोक का अंतरिम आदेश दिया और अधिवक्ता के वेंकटाचलपति की ओर से दायर जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की। बेंच ने विजय और अन्य पक्षों को तीन सप्ताह में सभी तथ्यात्मक और कानूनी दलीलों समेत अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इस्तीफा देने वाले अन्य विधायकों में एम. आर. विजयभास्कर (करूर), सी. विजयभास्कर (विरालिमलाई), एस. जयकुमार (पेरुंदुरई) और एसाकी सुब्बैया (अंबासमुद्रम) शामिल हैं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया है कि विधानसभा चुनाव जीतने वाले इन उम्मीदवारों के इस्तीफों से खाली हुईं सीटों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत उपचुनाव कराने के लिए ‘स्पष्ट रिक्तियां’ या उपलब्ध रिक्तियां घोषित न किया जाए। बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि किसी विधायक का इस्तीफा स्वीकार होने से सीट पर आकस्मिक रिक्ति तो बनती है, लेकिन इससे वह सीट अपने आप उपचुनाव कराने के लिए ‘स्पष्ट’ या ‘उपलब्ध’ रिक्ति नहीं बन जाती।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र
हाईकोर्ट ने कई महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया। प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि यदि किसी चुनाव याचिका में याचिकाकर्ता को निर्वाचित घोषित करने की भी मांग की गई है, तो उस सीट को उपचुनाव के लिए उपलब्ध ‘स्पष्ट रिक्ति’ नहीं माना जा सकता।
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