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छत्तीसगढ़ में डिजिटल फोरेंसिक लैब क्यों नहीं? हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा सवाल, दिए ये निर्देश

याचिकाकर्ता शिरीन मालेवर की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च 2025 को निर्धारित की है।

HighLights

  • राज्य सरकार को 27 मार्च से पहले शपथपत्र सहित अपना जवाब कोर्ट में दाखिल करना होगा।
  • केंद्र सरकार के पत्रों की अनदेखी पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया।
  • याचिकाकर्ता शिरीन मालेवर ने वकील के माध्यम से जनहित याचिका दायर की।

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में प्रदेश में डिजिटल फोरेंसिक लैब और विशेषज्ञों की अनुपलब्धता को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले को सुना और राज्य सरकार से जवाब तलब किया। कोर्ट ने पूछा कि डिजिटल फोरेंसिक लैब और विशेषज्ञों की अब तक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? इसके साथ ही, राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

    याचिकाकर्ता शिरीन मालेवर ने अधिवक्ता रुद्र प्रताप दुबे और गौतम खेत्रपाल के माध्यम से जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में उल्लेख किया गया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) के तहत इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की प्रमाणिकता के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन प्रदेश में न तो डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ हैं और न ही कोई मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला।

    केंद्र सरकार की स्थिति

    हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के अधिवक्ता रमाकांत मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और योजना का प्रारूप भेजा था। इसमें आईटी अवसंरचना, उपकरणों की स्थापना और प्रशिक्षित कर्मियों की नियुक्ति का उल्लेख था। राज्य सरकार को नोडल अधिकारी नियुक्त कर अपनी प्रयोगशालाओं को मान्यता दिलाने के लिए आवेदन करने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

    कोर्ट के सख्त निर्देश

    हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र दाखिल कर स्पष्ट करें कि डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों और प्रयोगशाला की स्थापना क्यों नहीं हुई? साथ ही, केंद्र सरकार के पत्रों का जवाब अब तक क्यों नहीं दिया गया, इसका भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च 2025 को निर्धारित की है।

    पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को विशेषज्ञों की तत्काल नियुक्ति के लिए उचित कदम उठाने को कहा था, जिस पर केंद्र सरकार ने शपथपत्र दाखिल कर अपनी प्रक्रिया की जानकारी दी है।

    देशभर में 16 स्थानों पर विशेषज्ञों की नियुक्ति, छत्तीसगढ़ में अब भी नहीं

    याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि देशभर में 16 स्थानों पर डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की नियुक्ति की गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ में अब तक किसी विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हुई है। आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79-ए के तहत भी प्रदेश में कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य परीक्षक नियुक्त नहीं किया गया, जिससे डिजिटल मामलों की जांच प्रभावित हो रही है।

    राज्य सरकार की देरी पर कोर्ट की नाराजगी

    सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि राज्य सरकार को 19 मार्च 2021 को ईमेल और 10 मार्च 2025 को पत्र के माध्यम से जानकारी दी गई थी, लेकिन केंद्र सरकार के पत्रों का अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया। इस पर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को 2021 के पत्र का जवाब व्यक्तिगत रूप से देने और देरी का कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

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