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    Home»छत्तीसगढ़»CG हाई कोर्ट का अहम फैसला: 2006 से पहले रिटायर कर्मचारियों को पेंशन का लाभ मिलेगा
    छत्तीसगढ़

    CG हाई कोर्ट का अहम फैसला: 2006 से पहले रिटायर कर्मचारियों को पेंशन का लाभ मिलेगा

    Chhattisgarh RajyaBy Chhattisgarh RajyaMarch 28, 2025
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    हाई कोर्ट
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    मुख्य बिंदु:

    • राज्य सरकार ने वित्तीय बोझ का तर्क दिया था।
    • हाई कोर्ट ने सरकार की दलील खारिज की।
    • संशोधित पेंशन का भुगतान 4 महीने में अनिवार्य।

      बिलासपुर: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 2006 से पहले रिटायर कर्मचारियों को मिलेगा पेंशन लाभ

      छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह छठवें वेतन आयोग के तहत 1 जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को पेंशन लाभ का भुगतान सुनिश्चित करे।

      यह फैसला न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने छत्तीसगढ़ शासकीय महाविद्यालयीन पेंशनर्स संघ बनाम छत्तीसगढ़ राज्य मामले में सुनाया। याचिकाकर्ता, छत्तीसगढ़ शासकीय महाविद्यालयीन पेंशनर्स संघ, सरकारी महाविद्यालयों के पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक पंजीकृत संस्था है। संघ ने सरकार की नीति को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में तर्क दिया गया कि 2006 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को छठवें वेतन आयोग का लाभ दिया गया, जबकि 2006 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है।

      राज्य सरकार की दलील खारिज

      राज्य सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि 2006 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों को यह लाभ देने से सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। हालांकि, हाई कोर्ट ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 के तहत मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को संयुक्त रूप से पेंशन भुगतान की जिम्मेदारी निभानी होगी।

      MP-CG के हजारों पेंशनर्स को राहत

      हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि सभी पात्र पेंशनर्स को संशोधित पेंशन का भुगतान 120 दिनों के भीतर किया जाए। इस फैसले से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के हजारों पेंशनभोगी कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

      हाई कोर्ट ने प्रशासन को लगाई फटकार, निगम आयुक्त के निलंबन की दी चेतावनी

      छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में बुधवार को अतिक्रमण, अव्यवस्थित फुटपाथ और पर्यावरण सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। पत्थलगांव सड़क मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन जिन कार्यों को एक आदेश से पूरा कर सकता है, उसे नज़रअंदाज कर रहा है और केवल दिखावा कर रहा है।

      हाई कोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम और जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि शहर में हुए अतिक्रमण हटाने के लिए उनके पास पहले से ही पर्याप्त आदेश हैं, लेकिन कार्रवाई न करने की मानसिकता चिंता का विषय है।

      फुटपाथ निर्माण पर उठे सवाल

      स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा बनाए गए फुटपाथों पर सवाल उठाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यहां न केवल दिव्यांगजन बल्कि एक सामान्य व्यक्ति के लिए भी चलना मुश्किल है। उन्होंने जिला कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए। मुख्य न्यायाधीश ने यहां तक कहा कि निगम आयुक्त की लापरवाही इतनी गंभीर है कि उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए।

      9 अप्रैल को अगली सुनवाई

      हाई कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं, क्योंकि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी।

      कचरे के ढेर पर भी हाई कोर्ट की नाराजगी

      सुनवाई के दौरान जरहाभाठा ओमनगर क्षेत्र में लगातार बढ़ते कचरे और सफाई कार्यों के नाम पर खर्च किए गए 4 करोड़ रुपये की खबर पर भी हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस मुद्दे को लेकर जनहित याचिका दर्ज की और जिला कलेक्टर व नगर निगम आयुक्त से व्यक्तिगत शपथपत्र पर जवाब मांगा है कि इन समस्याओं का समाधान कैसे किया जाएगा।

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