- आत्मानंद विद्यालय में पढ़ने वाली नौवीं की छात्रा
- आम बच्चों की तरह ही सुंदर लेखनी
- माता-पिता को बेहतर जीवन देना सपना
हौसलों की उड़ान: पैरों से लिखकर सपनों को साकार करती राखी
जगदलपुर। नानगुर स्वामी आत्मानंद विद्यालय की नौवीं कक्षा की छात्रा राखी नाग अपनी विलक्षण प्रतिभा से मिसाल बनी हुई है। जन्म से दिव्यांग होने के बावजूद, उसने अपनी पढ़ाई को कभी रुकावट नहीं बनने दिया। जब हाथों ने साथ नहीं दिया, तो उसने पैरों के पंजों से लिखना सीख लिया।
सालों की मेहनत और अभ्यास से अब उसकी लिखावट इतनी सुंदर और सुगठित हो गई है कि देखने में किसी सामान्य छात्र की तरह ही लगती है। राखी का परिवार कैकागढ़ पंचायत के बेंगलुरु गांव में रहता है। उसके पिता, धनसिंह नाग, एक निजी गैस एजेंसी के लिए साइकिल से गांव-गांव जाकर गैस सिलेंडर की डिलीवरी करते हैं, जबकि माँ चैती घरेलू महिला हैं और वनोपज जैसे इमली और महुआ संग्रहण से परिवार की आर्थिक मदद करती हैं।

सपना: माता-पिता का कर्ज उतारना
गरीबी कभी भी राखी की पढ़ाई के आड़े नहीं आई। माता-पिता ने हर मुश्किल के बावजूद उसकी शिक्षा को प्राथमिकता दी और उसे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अब राखी का सपना है कि वह आईएएस अधिकारी बने और अपने क्षेत्र के विकास में योगदान दे।
राखी कहती है, “माता-पिता ने तमाम संघर्षों के बीच मुझे पढ़ाया है। अब मैं उन्हें एक अच्छा जीवन देना चाहती हूँ और उनके सपनों को साकार करना चाहती हूँ।”
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