आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती कभी प्राचीन सातवाहन राजवंश की समृद्ध राजधानी रही थी और अपनी बौद्ध विरासत के लिए प्रसिद्ध थी। अब, लगभग 1,800 साल बाद, इसे पुनः राजधानी के रूप में स्थापित करने की कोशिशें जोरों पर हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परियोजना के तहत हजारों करोड़ रुपये की आधारशिला रख रहे हैं।
आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद, जिसने तेलंगाना राज्य के गठन के साथ हैदराबाद को राजधानी के रूप में छोड़ दिया, अमरावती को नई राजधानी के रूप में स्थापित करने का विचार सामने आया। अब, कई वर्षों की देरी और राजनीतिक उठापटक के बाद, यह परियोजना केंद्र और राज्य के सहयोग से पुनः शुरू की जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अमरावती में 58 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, जिसमें राजधानी अमरावती का निर्माण फिर से शुरू करना भी शामिल है। उन्होंने इसे महज एक शहर नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश को एक विकसित राज्य में बदलने की ताकत रखने वाला सपना बताया। पीएम मोदी ने कहा कि अमरावती वह शहर है, जहां आंध्र प्रदेश के युवाओं के सपने साकार होंगे। साथ ही, उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि शशि थरूर यहां हैं, तो कई लोगों की नींद उड़ी हुई होगी।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को राज्य की राजधानी के रूप में विकसित करने का सपना देखा था, और पीएम मोदी ने राज्य के विकास के लिए तेदेपा नीत सरकार को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद, हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बनाया गया था, और अमरावती को नई राजधानी के रूप में स्थापित किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने अमरावती के संस्थानों, राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे और रक्षा प्रतिष्ठानों सहित 94 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
पीएम मोदी ने इन परियोजनाओं को केवल कंक्रीट की संरचनाएं नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश और विकसित भारत की महत्वाकांक्षाओं का मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि अमरावती का नाम इंद्रलोक की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध था, और अब यह आंध्र प्रदेश की राजधानी बनना एक शुभ संकेत है। उनका मानना है कि स्वर्णिम आंध्र का निर्माण विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा, और अमरावती इस विजन को ऊर्जा प्रदान करेगा। उन्होंने आंध्र प्रदेश के लोगों को यह आश्वासन दिया कि वे हमेशा राज्य के विकास के लिए उनके साथ खड़े रहेंगे।

