जगदलपुर (Attack on Maoist): छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित बीजापुर जिले की कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर माओवादियों के खिलाफ चल रही निर्णायक कार्रवाई को अंतिम अंजाम तक पहुंचाने के लिए सुरक्षा बल अब इस क्षेत्र में नए सुरक्षा शिविर (एफओबी) स्थापित करेंगे।
कर्रेगुट्टा, जो माओवादियों का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था, अब सुरक्षा बलों की पहुंच में आ चुका है। यहां कई एफओबी खोलने की तैयारी की जा रही है, जिससे तेलंगाना सीमा पूरी तरह माओवादियों के लिए असुरक्षित हो जाएगी। लगातार आठ दिनों से जारी इस अभियान में पहले दिन से तैनात जवानों को विश्राम देने के लिए अब नए जवानों की तैनाती की गई है।
यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक इसका अंतिम उद्देश्य प्राप्त नहीं हो जाता। बस्तर में माओवादियों के मजबूत गढ़ तक सुरक्षा बल शनिवार को पहुंच चुके हैं और तब से कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर सघन सर्च ऑपरेशन चल रहा है। इस दौरान जवानों ने 150 से अधिक आईईडी और माओवादियों के दर्जनों बंकर नष्ट कर दिए हैं। 45 से 48 डिग्री सेल्सियस की तीव्र गर्मी के बीच अभियान चला रहे जवानों को पहाड़ी की चोटी पर एक प्राकृतिक जल स्रोत भी मिला है, जिससे उनका मनोबल और बढ़ा है।
छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा, जो चार दशकों से माओवादियों का दुर्ग रहा है, अब निर्णायक बढ़त के चलते सुरक्षा बलों के नियंत्रण में आता जा रहा है। पहले कभी दुर्गम पहाड़ी के कारण यह क्षेत्र अजेय माना जाता था, लेकिन अब फोर्स ने 12 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पार करते हुए इस क्षेत्र के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया है।
लगातार एफओबी की स्थापना से बस्तर में माओवादियों के गढ़ कमजोर होते जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, माओवादी संगठनों जैसे दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC), तेलंगाना स्टेट कमेटी (TSC), और बटालियन नंबर एक के शीर्ष नक्सलियों ने कर्रेगुट्टा को अपनी शरणस्थली बना रखा था। आठ दिन पहले शुरू हुए इस बड़े ऑपरेशन में 10,000 से अधिक जवानों ने कर्रेगुट्टा को चारों ओर से घेर लिया। पहली बार सुरक्षा बल इस दुर्गम पहाड़ी की चोटी तक पहुंचने में सफल रहे हैं।
अब सुरक्षा बल पहाड़ी के हर हिस्से की बारीकी से तलाशी ले रहे हैं और जल्द ही यहां कई एफओबी बनाए जाएंगे। इसके बाद अनुमान है कि लगभग 250 वर्ग किलोमीटर में फैली यह पहाड़ी शृंखला माओवादियों के लिए पूरी तरह असुरक्षित हो जाएगी।

