संपादकीय
-
भागवत का ‘हिंदू पुराण’…
सरसंघचालक मोहन भागवत अक्सर ‘हिंदू’ को लेकर संबोधित करते रहे हैं। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वैचारिकता भी है। कोई भी संगठन या उसका नेतृत्व अपनी विचारधारा का प्रचार कर सकता है। भागवत का मानना है कि भारत का प्रत्येक नागरिक बुनियादी और आत्मा के स्तर पर ‘हिंदू’ है। उसकी पूजा-पद्धति भिन्न हो सकती है। यानी मुसलमान, ईसाई, पारसी, यहूदी…
Read More » -
समग्र राष्ट्रीय न्यायिक नीति; समय की जरूरत…
भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी में आयोजित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों का सम्मेलन भारतीय न्यायपालिका के लिए एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जाना चाहिए. यह केवल औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि उस न्यायिक व्यवस्था पर गंभीर चिंतन है, जो वर्षों से लंबित मामलों, प्रक्रियागत जटिलताओं और आम नागरिक की सीमित पहुंच से जूझ रही है. ऐसे समय में…
Read More » -
मर्यादा हनन का सदन…
प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ पर अपना जवाब नहीं दे सके। राष्ट्रपति अभिभाषण के संदर्भ में प्रधानमंत्री अपनी बात सदन में नहीं रख सके, जबकि वह सदन के नेता भी हैं। संसदीय इतिहास में यह अभूतपूर्व विडंबना है और देश की संसदीय व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। चूंकि स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल…
Read More » -
कैंसर इलाज मुफ्त क्यों नहीं?
कैंसर और मधुमेह (डायबिटीज) भारत में दोहरा, जानलेवा, गंभीर स्वास्थ्य संकट हैं। देश में 2025 तक मधुमेह पीडि़तों की अनुमानित संख्या 12.49 करोड़ है। करीब 8-18 फीसदी कैंसर रोगियों को मधुमेह भी होता है, लिहाजा टाइप-2 मधुमेह के कारण स्तन, कोलन, लिवर, पैंक्रियाज के कैंसर का जोखिम 20-30 फीसदी तक बढ़ जाता है। भारत में मुख कैंसर विश्व में सबसे अधिक…
Read More » -
शादी करने के ‘उतावले युवक लुटेरी दुल्हनों के बन रहे शिकार!
अनेक राज्यों में शादी के लिए उतावले युवाओं की नकली बिचौलियोंं के माध्यम से अपने गिरोह की महिलाओं के साथ शादी करवाने वाले ठगों के गिरोह सक्रिय हैं और ये ‘लुटेरी दुल्हनें’ शादी के चंद ही दिनों के भीतर अपने ‘ससुरालियों’ की जमापूंजी पर हाथ साफ करके फरार हो जाती हैं जिनकी चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं : *…
Read More » -
आदर्श नायक गांधी जी को नमन…
देश के स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अविस्मरणीय योगदान से पूरी दुनिया परिचित है। वे जीवन पर्यन्त देशवासियों के लिए आदर्श नायक बने रहे। अहिंसा की राह पर चलते हुए देश को अंग्रेजी दासता से मुक्ति दिलाने वाले गांधी जी ने पूरी दुनिया को अपने विचारों से प्रभावित किया था। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर कई किताबें भी…
Read More » -
‘हम भारत के लोग…’
भारत का 77वां गणतंत्र दिवस बीत गया। एक राष्ट्रीय पर्व, राष्ट्रीय समारोह और राष्ट्रीय स्वाभिमान का दिवस भी बीत गया। आप सभी ने राजधानी दिल्ली के ‘कत्र्तव्य पथ’ पर, परेड के जरिए, भारत की सामरिक, सांस्कृतिक, कलात्मक, आध्यात्मिक और क्षेत्रीय संप्रभुता का प्रदर्शन टीवी पर देखा होगा। कितना विविध, विराट और एकजुट, अखंड है भारत! यह व्यावहारिक तौर पर ‘संविधान दिवस’…
Read More » -
ईरान के साथ खड़ा भारत
India Iran Relation: पश्चिमी देशों के दबाव में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा ईरान के खिलाफ लाये गये मानवाधिकार उल्लंघन के प्रस्ताव के विरोध में वोट देकर भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि विदेश नीति के मामले में वह बाहरी शक्ति या विदेशी दबावों के आगे नहीं झुकता. India Iran Relation: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा ईरान के…
Read More » -
व्यवस्था में यह सुराख क्यों ?
किसी भी देश के गणतंत्र का 77 वां गणतंत्र दिवस इस बात के लिए अत्यंत अहम रहता है कि लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक मूल्यों को किस तरह आत्मसात किया जा रहा है. देश में गण की आवाज में जनता के सुर किस तरह मिल रहे हैं और तंत्र इन संयुक्त सुरों पर जनहित में कैसे काम कर रहा है – यह…
Read More » -
संविधान के प्रति राजनीतिक जागरूकता पर्याप्त नहीं, स्वाभिमान के रूप…
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। ब्रिटिश आधिपत्य से स्वाधीनता के समय भारत के नेतृत्व ने भावी पीढ़ियों के शासन-प्रशासन हेतु एक संविधान का निर्माण किया। दो वर्ष, 11 महीने और 18 दिन तक संविधान सभा की बैठकें हुईं। उसके परिणामस्वरूप हमें विश्व का विशालतम संविधान प्राप्त हुआ। नौ दिसंबर 1946 से प्रारंभ कर 26 नवंबर 1949 तक हमारे…
Read More »