CG News: बिलासपुर में मानसिक अस्पताल की बदहाल स्थिति पर हाई कोर्ट सख्त, मांगी विस्तृत रिपोर्ट – जानिए पूरा मामला
Chhattisgarh News: याचिका में कहा गया कि WHO मानकों के अनुसार हर 10 हजार लोगों पर एक मनोचिकित्सक होना चाहिए, जबकि छत्तीसगढ़ में औसतन आठ लाख लोगों पर सिर्फ एक मनोचिकित्सक; हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सेंदरी मानसिक चिकित्सालय की अव्यवस्थाओं को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से जवाबदेही तय करते हुए कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि अब तक मानसिक चिकित्सकों की हुई नियुक्तियों का पूरा ब्योरा—नाम, तिथि सहित—शपथपत्र के माध्यम से दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किया जाए।
गौरतलब है कि सेंदरी स्थित यह प्रदेश का एकमात्र सरकारी मानसिक चिकित्सालय है, जहां मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत जरूरी प्रावधान और सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। इस मुद्दे पर विशाल कोहली द्वारा अधिवक्ता हिमांशु पांडेय के माध्यम से जनहित याचिका दाखिल की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस गंभीर मामले को स्वत: संज्ञान में लेते हुए याचिका के साथ एकीकृत कर सुनवाई शुरू की। याचिका में बताया गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार हर 10 हजार लोगों पर एक मनोचिकित्सक होना चाहिए, जबकि छत्तीसगढ़ में आठ लाख की आबादी पर औसतन एक ही मनोचिकित्सक उपलब्ध है।
इसके अतिरिक्त, प्रत्येक जिले में मानसिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने का प्रावधान अब तक लागू नहीं किया गया है। पिछली सुनवाई में अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में बार-बार देरी को लेकर सख्त नाराजगी जाहिर की थी। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि 22 अगस्त, 18 सितंबर, 5 नवंबर और 14 नवंबर 2024 को समय दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने अद्यतन अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बिलासपुर से प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट का हवाला भी दिया, जिसमें बताया गया था कि सेंदरी अस्पताल में 180 मरीजों के देखभाल के लिए मात्र दो वार्ड बॉय कार्यरत हैं। अदालत ने इसे अस्पताल की दुर्दशा और राज्य सरकार की लापरवाही का प्रतीक बताते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सभी रिक्त पदों पर भर्ती और अन्य व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी शपथपत्र के रूप में प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
शशांक गोयल की जमानत याचिका खारिज
इसी दौरान, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाले में आरोपित शशांक गोयल को एक बार फिर राहत नहीं मिली। मंगलवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकल पीठ ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले सीबीआई की विशेष अदालत भी उसकी जमानत याचिका नामंजूर कर चुकी है।
सीबीआई की ओर से अधिवक्ता बी. गोपाकुमार ने अदालत को बताया कि शशांक गोयल की रिहाई से ongoing जांच प्रभावित हो सकती है। उल्लेखनीय है कि CGPSC द्वारा 2020 से 2022 के बीच आयोजित परीक्षाओं और इंटरव्यू में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत कई वीआईपी और उनके रिश्तेदारों के चयन पर गंभीर सवाल उठे थे। इस मामले में अब तक आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर के निदेशक श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि श्रवण गोयल का पुत्र शशांक गोयल फिलहाल जेल में है।



