पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान रिश्तों में तनाव
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, और भारत की सख्ती ने पाकिस्तान को बुरी तरह डरा दिया है। पाकिस्तान के नेता युद्ध के बादल मंडराने का दावा कर रहे हैं, जबकि अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
अमरुल्लाह सालेह का बयान
अमरुल्लाह सालेह ने एक्स (Twitter) पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “भारत ने अपने दुश्मन के खिलाफ इलेक्ट्रिक चेयर का इस्तेमाल करने की बजाए उसके गले में एक लंबी रस्सी डाल दी है।” उनका यह बयान दरअसल यह दर्शाता है कि भारत अपने दुश्मन को एक झटके में समाप्त करने के बजाय धीरे-धीरे सजा दे रहा है।
It seems …
India has placed a very long rope around its enemy’s neck instead of using an electric chair for execution.
— Amrullah Saleh (@AmrullahSaleh2) May 4, 2025
यह पहली बार नहीं है जब अमरुल्लाह सालेह ने पाकिस्तान पर बयान दिया है। पहलगाम हमले के बाद जब दुनिया भर से इस हमले की कड़ी निंदा हो रही थी, तब अमरुल्लाह ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “आतंकवाद के खिलाफ इन खोखली सांत्वनाओं पर यकीन करना बेवकूफी होगी। जब आप सचमुच आतंक के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे, तो इनमें से कई लोग अपने हाथ पीछे खींच लेंगे और कुछ लोग अपने फायदे के लिए आतंकवाद का समर्थन भी करेंगे।”
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पर भी प्रतिक्रिया
हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने अमेरिका के पैसे पर आतंकवाद को बढ़ावा देने की बात कबूल की थी। इस वीडियो पर अमरुल्लाह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि पाकिस्तान को अपनी गलतियों को स्वीकार करना होगा।
“We were contractors for dirty jobs,” says Khawaja Muhammad Asif, Minister of Defense of the Islamic Republic of Pakistan.
My question: Has the contract been extended with a new customer, or have you renewed it with the previous one? We see no clear evidence of its termination. https://t.co/HY5xW7TqVF
— Amrullah Saleh (@AmrullahSaleh2) April 26, 2025
अमरुल्लाह सालेह कौन हैं?
अमरुल्लाह सालेह अफगानिस्तान के पंजशीर प्रांत से ताल्लुक रखते हैं। बेहद कम उम्र में वह अपने परिवार से अलग हो गए और अहमद शाह मसूद के नेतृत्व में एंटी-तालिबान आंदोलन का हिस्सा बने। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान ने अमरुल्लाह को कई बार जख्मी किया है।
तालिबान के खिलाफ संघर्ष
1996 में तालिबान ने अमरुल्लाह की बहन को मार डाला था, जिसके बाद से वह तालिबान के खिलाफ हो गए थे। अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा तख्तापलट करने से पहले अमरुल्लाह सालेह अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति रह चुके हैं।

