रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में मौसम के बिगड़े मिजाज ने भारी तबाही मचाई है। जिले में करीब 12 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हालात गंभीर हो गए। लगातार बारिश के चलते जगह-जगह जलभराव हो गया, जिससे कई बस्तियां पानी में डूब गईं। इस प्राकृतिक आपदा के बीच जब लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब रीवा की एसडीईआरएफ (SDERF) टीम ने देवदूत बनकर मोर्चा संभाला और एक हजार से अधिक लोगों की जिंदगी बचाई।
बांधों के गेट खुलने से उफनी तमस नदी, त्योंथर में तबाही
लगातार बारिश और कई बांधों के गेट खोले जाने के बाद तमस नदी पूरी तरह उफान पर आ गई है। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे तराई अंचल त्योंथर क्षेत्र में पानी ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र के करीब 309 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और लगभग 20 से अधिक गांवों का सड़क संपर्क टूट चुका है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य तेज कर दिए और कुल 16 राहत शिविर बनाए गए हैं, जिनमें जरूरतमंदों को शरण दी गई है।
कलेक्टर और एसपी ने संभाला मोर्चा, खुद पहुंचे बोट लेकर
स्थिति का जायजा लेने के लिए रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी, एसपी गुरुकरण सिंह और क्षेत्रीय विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने खुद मोटरबोट में बैठकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। अधिकारियों ने पानी के बीच फंसे लोगों का हालचाल जाना और मौके पर मौजूद टीमों को रेस्क्यू में तेजी लाने के निर्देश दिए। प्रशासन के अनुसार, बाढ़ की चपेट में करीब 6 हजार घर आए हैं, और राहत शिविरों में लगातार लोगों को मदद पहुंचाई जा रही है।
- रीवा जिले में 12 घंटे की मूसलाधार बारिश से कई इलाके जलमग्न हो गए।
- SDERF की पांच टीमों ने मिलकर 1,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला।
- तमस नदी के उफान पर आने से त्योंथर अंचल के 300 से अधिक गांव प्रभावित हुए।
- प्रशासन ने 16 राहत शिविर बनाए हैं, जहां प्रभावितों के ठहरने का इंतजाम है।
- कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी और एसपी गुरुकरण सिंह ने बोट से इलाकों का निरीक्षण किया।
एसडीईआरएफ का सराहनीय रेस्क्यू ऑपरेशन
एसडीईआरएफ के जवानों ने सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में पहुंचकर अपनी जान जोखिम में डाली। जिन घरों में कई फीट तक पानी भर चुका था, वहां से नवजात शिशुओं, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। फिलहाल बारिश का दौर थमने के बाद जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, और नदियां भी शांत होने लगी हैं। पानी उतरने के साथ ही लोग अब राहत की सांस लेते हुए अपने घरों की ओर वापस लौटने लगे हैं।

