वृद्धावस्था और हादसे में मिटे अंगूठे के निशान, आधार वेरिफिकेशन में अड़चन… योजनाओं से वंचित गरीब किसान
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के सीपत क्षेत्र के दिव्यांग किसान सुजान सिंह सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं। हादसे ने उनकी चलने-फिरने की क्षमता छीन ली, और बढ़ती उम्र ने उनके हाथों की रेखाएं भी मिटा दी हैं।

बिलासपुर (सीपत):
सीपत क्षेत्र के दिव्यांग किसान सुजान सिंह बीते दो वर्षों से सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता का शिकार बने हुए हैं। एक दुर्घटना के बाद वे चलने-फिरने में असमर्थ हो गए, और उम्र के साथ उनके हाथों की लकीरें इतनी धुंधली हो चुकी हैं कि अब उनके अंगुलियों के निशान आधार सत्यापन में असफल हो रहे हैं। यही तकनीकी बाधा उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और अन्य सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ से वंचित कर रही है।
न आधार सत्यापन, न दिव्यांगता पेंशन
फिंगरप्रिंट न मिलने के कारण उनका ई-केवाईसी पूरा नहीं हो पा रहा, जिससे उन्हें किसान सम्मान निधि की 11 किस्तें नहीं मिलीं। साथ ही, दिव्यांगता पेंशन की राशि भी अब तक उनके खाते में नहीं आई। सुजान सिंह ने एसडीएम मस्तूरी से लेकर कलेक्टर तक जनदर्शन में गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला—समाधान नहीं।

बैंक-दर-बैंक भटकते स्वजन
परिवार के लोग अब तक जिला सहकारी बैंक, डाकघर और एसबीआई की शाखाओं के चक्कर काट चुके हैं, पर हर जगह निराशा ही हाथ लगी। सुजान सिंह अकेले नहीं हैं, ऐसे कई और वृद्ध और दिव्यांग हैं जिनकी उंगलियों के निशान अब आधार सत्यापन में असफल हो रहे हैं।
न मशीन, न विकल्प
सीपत और एनटीपीसी क्षेत्र के किसी भी बैंक या कार्यालय में रेटिना स्कैनिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे वृद्ध और दिव्यांग नागरिकों के लिए कोई वैकल्पिक आधार सत्यापन प्रणाली मौजूद नहीं है।
व्यवस्था से टूटा भरोसा
सुजान सिंह ने 5 अगस्त 2023 को जनदर्शन में आवेदन दिया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने एसडीएम, कलेक्टर, ग्राम सेवक और कृषि विभाग तक अपनी बात पहुंचाई, फिर भी उनके स्वजन दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सुजान सिंह का कहना है—सरकारें चुनाव के समय किसानों का नाम लेकर वोट मांगती हैं, लेकिन जब मदद की ज़रूरत होती है, तो वही किसान अकेला रह जाता है।



