Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल श्री डेका
    • प्रशासनिक फेरबदल: उप सचिव और अवर सचिवों समेत कई कर्मचारियों के तबादले
    • अमर शहीद सुखदेव की जयंती पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि
    • छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की पुनर्विकास योजनाओं (Re-development) में तेजी, शासन स्तर पर विचार जारी
    • मोहाली में यात्रियों से भरी बस पलटी, करीब 22 यात्री गंभीर घायल
    • जालना में 19 साल के युवक की धारदार हथियार से बेरहमी से हत्या
    • कल खत्म हो रहा Amazon Great Summer Sale
    • Rs 20,000 के बजट में अब मिल रहे हैं दमदार 5G स्मार्टफोन, लंबी बैटरी, फास्ट स्पीड और शानदार कैमरा…..
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, May 16
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»छत्तीसगढ़»उपनिषद से एआई तक विषय पर आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने रखे विचार
    छत्तीसगढ़

    उपनिषद से एआई तक विषय पर आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने रखे विचार

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJanuary 24, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    रायपुर- नवा रायपुर में आयोजित साहित्य महोत्सव 2026 के दूसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप पर साहित्य : उपनिषद से एआई तक विषय पर केंद्रित परिचर्चा आयोजित हुई। इस परिचर्चा में वक्ता के रूप में ट्रिपल आईटी नवा रायपुर के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास, वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रफुल्ल केतकर, वरिष्ठ लेखक डॉ. गोपाल कमल शामिल हुए। परिचर्चा के सूत्रधार साहित्यकार श्री संजीव तिवारी रहे, परिचर्चा का यह सत्र कवि जगन्नाथ प्रसाद भानु को समर्पित रहा। इस अवसर पर डॉ. गोपाल कमल द्वारा लिखित पुस्तक, गुणाढ्य की गुणसूत्र कथा का विमोचन किया गया।

    ट्रिपल आईटी के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास ने कहा कि एआई का जो रूप आज हम देख रहे हैं, इसके पीछे विगत 30–40 वर्षों की मेहनत है। एआई निरंतर निखरता जा रहा है। तकनीक खुद को परिमार्जित करती जाती है, यह प्रक्रिया सतत है। एआई नेट पर उपलब्ध जानकारी, आंकड़ों और सूचनाओं का विश्लेषण कर हमें डिस्क्रिप्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में समझाता है। धीरे-धीरे एआई निखरा और प्रिडिक्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में काम करने लगा। आज एआई भविष्य की चीजों को भी बताता है। उन्होंने कहा कि नवंबर 2022 में पहली बार चैट जीपीटी आया। सिर्फ तीन साल में एआई का रूप कितना भव्य हुआ है, आप देखिए। हम एआई के भविष्य की अब कल्पना भी नहीं कर सकते। भाषा के मानकीकरण में एआई की क्या भूमिका होगी, यह हम सभी के बीच एक बड़ी चुनौती है।

    वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रफुल्ल केतकर ने परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि गीता के 18 अध्यायों में सभी तरह के ज्ञान का समावेश है। एआई को लेकर लोग चिंतित हैं कि एआई का फ्यूचर क्या होगा। एआई के आधार पर जापान ने जब रोबोट बनाया तो वह स्वयं को नेगेटिव प्रॉम्प्ट देने लगा। एआई कमांड और प्रॉम्प्ट पर काम करता है। एआई वही बताता है जो नेट पर उपलब्ध है। श्री केतकर ने कहा कि हमारे ऋषि सूचना की नहीं, ज्ञान की बात करते थे। वे एआई से बहुत ज्यादा आगे थे। यदि हम मैकाले की शिक्षा पद्धति की बात करें तो उसने हमें अच्छा उत्तर लिखने वाला बना दिया। प्रश्न जितना गहरा होगा, उत्तर भी उतना ही गहरा होगा। मानव के ज्ञान का उद्देश्य प्रकृति पर विजय पाना नहीं, उसके नियमों को समझकर अपने आपको प्रकृति के अनुरूप ढालना था।

    वरिष्ठ लेखक डॉ. गोपाल कमल ने सत्र में अपने संबोधन में कहा कि हमारे साथ में सोचने की परंपरा ऋग्वेद से आती है। हम सभी एआई में डीप लर्निंग की बात करते हैं। भाषा कहां से आती है, वह आकार कैसे लेती है, मनुष्य भाषा तक कैसे पहुंचा, इस पर होने वाले कार्य और अध्ययन को साइकोलिंग्विस्टिक के नाम से जाना जाता है। जेनेटिक कोड के जरिए ही हम नई चीजों को सीख पाते हैं। डॉ. गोपाल ने कहा कि सोमदेव ने कथासरितसागर के नाम से संस्कृत में पुस्तक लिखी, इसे हम गुणाढ्य के रूप में देख सकते हैं। संस्कृत के लगभग 3900 सूत्र हैं। महेश्वर सूत्रों से हम सभी शब्दरूप और धातुरूप बना सकते हैं। एआई में हम जीरो से एक का सहारा लेते हैं। गुणसूत्र की भाषा से एआई के संचार नेटवर्क को गढ़ा गया है।

    परिचर्चा के सूत्रधार, साहित्यकार श्री संजीव तिवारी ने कहा कि मेरे समझ में उपनिषद और एआई एक जैसे हैं। वेद ज्ञान का खजाना है, जिसका भाष्य उपनिषद है। एआई भी प्रश्नोत्तर शैली में उत्तर देता है। हमारा उपनिषद एआई का मूल है। उन्होंने कहा कि ट्रिपल आईटी हैदराबाद जैसे संस्थान एआई को लेकर काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए दूसरे संस्थान भी काफी अच्छा काम कर रहे हैं, ताकि एआई में बेहतर से बेहतर रूप में छत्तीसगढ़ी भाषा निखरकर आ सके। इस अवसर पर गणमान्य साहित्यकार एवं श्रोता उपस्थित रहे।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल श्री डेका

    May 15, 2026

    प्रशासनिक फेरबदल: उप सचिव और अवर सचिवों समेत कई कर्मचारियों के तबादले

    May 15, 2026

    अमर शहीद सुखदेव की जयंती पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि

    May 15, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.