Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • निर्माण श्रमिकों के जीवन में आर्थिक सुरक्षा का संबल, 54 हजार से अधिक परिवारों को मिली सहायता
    • मुख्यमंत्री श्री साय और केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी की उपस्थिति में खनन एवं कोयला क्षेत्र की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक सम्पन्न
    • केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नवा रायपुर में किया विकसित भारत संकल्प पार्क का लोकार्पण
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर बीएसपी के हजारों आवासधारियों को बड़ी राहत, किराए में 75 प्रतिशत तक की कटौती
    • चक्रवात मुरासु का लैंडफॉल जारी, आधी रात आंध्र प्रदेश के तट से टकराया, स्कूल-कॉलेज बंद, फ्लाइट्स कैंसल, जानिए अपडेट्स
    • ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को आलोचना और अपशब्द के लिए भी तैयार रहना चाहिए, जानिए मद्रास हाई कोर्ट ने क्यों की कड़ी टिप्पणी
    • कौन हैं राजेश कुमार IPS? अरुणाचल प्रदेश के नए DGP
    • छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026-कृषि विभाग के स्टॉल में हरियाली का खूबसूरत नजारा
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Tuesday, November 3
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»करों में छूट, नहीं है समाधान
    लेख-आलेख

    करों में छूट, नहीं है समाधान

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inNovember 3, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    वास्तव में विदेशी संस्थागत निवेशक कई अन्य कारणों से अपने शेयर बेच रहे हैं। सबसे पहला कारण अमरीका में ब्याज दरों में वृद्धि और अमरीकी सरकार के बांडों पर आकर्षक लाभ है…

    पिछले काफी समय से भारत के शेयर बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशक भारत में बिकवाली कर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर ले जा रहे हैं। वर्ष 2026-27 के प्रथम 7 महीने से भी कम समय में अभी तक विदेशी संस्थागत निवेशक 1.7 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं, जिससे रुपए पर दबाव बन रहा है और उसमें अवमूल्यन हो रहा था। नीति निर्माता चिंतित हैं और तरह-तरह से प्रयास कर उन्हें भारत की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार पर उन्हें पहले से अधिक रियायतें देने संबंधी दबाव भी बन रहा है।

    रियायतों का अंबार : यह तर्क दिया जा रहा था कि विदेशी संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका करों में रियायत देने से संबंधित है। 5 जून 2026 को सरकार और रिजर्व बैंक ने स्वीकृत बांडों से होने वाले पूंजीगत लाभ को पूर्व के 12.5 प्रतिशत पूंजीगत लाभ कर और आयकर से छूट दी गई है। इसके अलावा पूर्व में जहां 15, 30 और 40 वर्ष के ब्रांड विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक नहीं खरीद सकते थे, लेकिन अब उन्हें इसकी अनुमति दी गई है। इसी प्रकार अन्य प्रकार की रियायतें भी विदेशी संस्थागत निवेशकों को दी गई हैं। लेकिन उसके बावजूद इन निवेशकों की बिकवाली बदस्तूर जारी है। लेकिन यह जरूर हुआ है कि अब विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सरकारी बांडों में निवेश बढ़ा दिया है। अब क्या मांग है विदेशी संस्थागत निवेशकों की? हालांकि सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों की सरकारी ऋण प्रतिभूतियों पर आयकर और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभों से छूट पहले ही दे दी है, अब उनकी मांग है कि उन्हें शेयरों पर मिलने वाले पूंजीगत लाभों और अन्य लाभों पर कर से छूट मिलनी चाहिए। गौरतलब है कि यह छूट उनको पहले भी प्राप्त थी। दूसरे, विदेशी निवेशक सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में भी कमी चाहते हैं। गौरतलब है कि इस साल बजट में सरकार ने ‘फ्यूचर और ऑप्शन’ (एफएंडओ) में एसटीटी को बढ़ाया था। पिछले सालों में एफएंडओ की वजह से रिटेल इन्वेस्टरों को बड़ा घाटा उठाना पड़ा था और इसका फायदा बड़ी विदेशी कंपनियों ने उठाया। सेक्यूरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड (सेबी) की रिपोर्ट के अनुसार 4850 करोड़ रुपए का गैर-काूननी लाभ ‘जेनस्ट्रीट’ सरीखी कंपनी ने एफएंडओ से कमाया। कुल मिलाकर कंपनी ने जनवरी 2023 और मार्च 2025 के बीच 36700 करोड़ रुपए का लाभ कंपनी ने कमाया। यह लाभ वास्तव में छोटे निवेशकों का नुकसान है। तीसरे, विदेशी संस्थागत निवेशक चाहते हैं कि प्राइवेट एक्टिविटी फंड टाइगर ग्लोबल, से संबद्ध मामले में जो सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया है, उसके बारे में यह स्पष्ट करें कि 2027 के पूर्व के निवेश पर भारतीय टैक्स लागू होंगे अथवा नहीं। गौरतलब है कि 2017 में भारत ने मॉरीशस के साथ दोहरे टैक्स वचन समझौते में बदलाव कर दिया था और मॉरीशस के रास्ते आने वाले निवेश पर कर लगाने का निर्णय लिया था। चौथे, विदेशी संस्थागत निदेशक अन्य प्रकार से सुविधाएं चाहते हैं, जैसे टैक्स रिफंड को आसान बनाना, केवाईसी और लाभार्थी का खुलासा करने की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। समझा जा सकता है कि विदेशी संस्थागत निवेशक वे सभी सुविधाएं चाहते हैं जो अभी तक घरेलू निवेशकों को उपलब्ध नहीं हैं। करों में छूट अथवा मुक्ति अथवा केवाईसी नियमों में छूट आदि देश के लिए अमंगलकारी होते हैं।

    सर्वप्रथम, हालांकि सरकार ने पहले से ही सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से आय और पूंजीगत लाभों को कर मुक्त कर दिया है, यदि शेयरों को भी करों से मुक्त किया जाएगा तो उसका नुकसान सरकारी राजस्व को होगा, जिससे भारत सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है, जो महंगाई बढ़ाने वाला और भविष्य की पीढिय़ों पर कर्ज भी बढ़ाने वाला है। गौरतलब है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों को सरकारी बांडों पर पूंजीगत लाभ और आयकर में छूट से लगभग 10000 करोड़ के राजस्व का नुकसान होगा। अब जब विदेशी निवेशक यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें शेयरों पर होने वाले पूंजीगत लाभ और आय पर भी कर की छूट मिले, तो यह नुकसान कई गुना होने की संभावना है। दूसरे, विदेशी निवेशकों पर कर में रियायत को भारतीय निवेशकों के साथ भेदभाव भी माना जा सकता है। इससे भारतीयों द्वारा बचत का प्रोत्साहन घटेगा, जिससे विदेशियों पर निर्भरता बढ़ सकती है। तीसरे, विदेशी निवेशकों की एसटीटी कम करने की मांग, आय निवेशक के लिए अत्यंत घातक है। 2026-27 के बजट में एसटीटी बढ़ाने के कारण एफएंडओ में छोटे निवेशकों का आकर्षण कम हुआ है, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों का अनुचित लाभ कम हुआ है। ऐसे में एसटीटी को कम करने की मांग अनुचित तो है ही, यदि यह मांग मान ली जाएगी तो छोटे निवेशकों को बड़ा नुकसान जारी रहेगा। चौथे, विदेशी संस्थागत निवेशक चाहते हैं कि उनके लाभार्थी निवेशकों की जानकारी को गुप्त रखा जाए, इसलिए वे केवाईसी नियमों से छूट जाते हैं। इससे पहले यूपीए शासनकाल में विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा पार्टिसिपेटरी नोट्स के माध्यम से भारत के शेयर बाजारों में पैसा लगाया जाता था। इस पद्धति का खासा विरोध हुआ था, क्योंकि ऐसा माना जा रहा था कि पार्टिसिपेटरी नोट्स के माध्यम से आतंकवादी संगठनों एवं अन्य प्रकार की गैर कानूनी स्रोतों से पैसा भारत के शेयर बाजार में आता है और उससे होने वाले लाभ भारत के खिलाफ ही इस्तेमाल किए जाते हैं। यदि केवाईसी नियमों को शिथिल किया जाएगा तो यह कानूनी रूप से अनुचित ही नहीं, बल्कि गैर-कानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे वाला होगा।

    आर्थिक विश्लेषकों की क्या है राय : अधिकांश आर्थिक विश्लेषक यह मानते हैं कि करों में छूट अथवा अन्य सुविधाएं वास्तव में विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा बिकवाली को नहीं रोक पाएगी क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशक देश में करों अथवा नियमों के कारण बिकवाली नहीं कर रहे, बल्कि दुनिया में बदलते हालात विदेशी निवेशकों द्वारा भारत में उनके द्वारा शेयरों की बिक्री का कारण बन रहे हैं। भारत एक उभरती अर्थव्यवस्था है, और भारत से इन संस्थागत निवेशकों को खासा लाभ भी हुआ है। दशकों तक विदेशी संस्थागत निवेशक भारत से 30 से 40 प्रतिशत लाभ कमाते रहे हैं। वास्तव में विदेशी संस्थागत निवेशक कई अन्य कारणों से अपने शेयर बेच रहे हैं। सबसे पहला और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण कारण अमरीका में ब्याज दरों में वृद्धि और अमरीकी सरकार के बांडों पर आकर्षक लाभ है। पूर्व में अमरीका में फेडरल दर 0.25 प्रतिशत तक थी। लेकिन हाल ही के वर्षों में फेडरल रिजर्व (अमरीकी केंद्रीय बैंक) ने बढ़ती महंगाई के चलते फेडरल दर बढ़ा दी है, और वर्तमान में यह 3.75 से 4.0 प्रतिशत है। ऐसे में संस्थागत निवेशक वापसी का रुख कर रहे हैं। दूसरा प्रमुख कारण भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। ऐसी किसी भी स्थिति में विदेशी निवेशक अपने घरेलू बाजारों की ओर रुख कर लेते हैं। इस स्थिति को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ‘रन फॉर सेफ हेवन’ कहा जाता है।

    निवेशकों द्वारा बिकवाली का तीसरा प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की बढ़ती कीमत और उसकी वजह से दुनिया के दूसरे भागों में वित्त की बढ़ती मांग है। चौथा कारण, रुपए का अवमूल्यन है। क्योंकि भारतीय रुपया पिछले समय में काफी ज्यादा गिर गया था, इसलिए निवेशकों को लाभ होने पर भी डॉलरों में वह लाभ बहुत हो जाता है। इसलिए वे बाहर की ओर रुख कर लेते हैं। पांचवां कारण यह है कि कई अन्य देशों में उभरते उद्योगों की वजह से वहां निवेश की संभावनाएं ज्यादा हैं। इस संदर्भ में दक्षिण कोरिया और ताईवान की ओर विदेशी निवेशक रुख कर रहे हैं। भारत में विदेशी निवेश पर लगने वाले कर अथवा केवाईसी के नियम अथवा अन्य भारतीय नियम विदेशी निवेशकों द्वारा बाहर का रुख करने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इसलिए करों में छूट देना हितकारी नहीं है।-डा. अश्वनी महाजन

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    हमारी भावनाएं भी व्यापार का हिस्सा बना दी गई हैं

    November 3, 2026

    हालिया विधान परिषद चुनाव स्थानीय मुद्दों का महत्व दर्शाते हैं

    November 3, 2026

    पंजाब विधानसभा चुनाव : नशा, कानून-व्यवस्था और कर्ज होंगे मुख्य मुद्दे

    October 31, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.