कांकेर जिले के दुधावा क्षेत्र में इन दिनों तेंदुए का आतंक बढ़ता जा रहा है। दिसम्बर 2024 से अब तक तेंदुए ने चार बच्चों को शिकार बना लिया है, जिनमें से एक की मौत हो गई और एक बच्चा विकलांग हो गया है। शुक्रवार की रात भी एक आठ वर्षीय बच्चे पर तेंदुए ने हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया। बच्चा आंगन में खेल रहा था, तभी तेंदुआ आकर उसके गले को पकड़ कर उसे खींचने लगा। इस दौरान बच्चे के बड़े भाई ने साहस दिखाया और जोर-जोर से चिल्लाते हुए छोटे भाई को खींचने की कोशिश की। तेंदुआ बच्चे को छोड़कर भाग गया।
ग्रामीण नंदलाल मंडावी ने बताया कि शाम सात बजे बच्चे का भाई पास में था और जब उसने तेंदुए को हमला करते देखा, तो उसने जोर से आवाज लगाई। अगर वह अपने भाई को नहीं खींचता, तो तेंदुआ उसे ले जाकर मार डालता।
ग्रामीणों का मानना है कि दुधावा क्षेत्र में तेंदुए के हमले की एक बड़ी वजह भारतमाला सड़क योजना है। रायपुर से विशाखापट्टनम को जोड़ने के लिए जो सड़कों का निर्माण हो रहा है, उसके लिए दुधावा के मालगुंडी पहाड़ी को काटा जा रहा है, जिसमें रोज हैवी ब्लास्टिंग की जा रही है। इस वजह से तेंदुए और भालू अपना रहवास छोड़कर बस्तियों की ओर आ रहे हैं। शुरुआत में ये तेंदुए पालतू जानवरों को शिकार बनाते थे, लेकिन अब इंसानों पर भी हमले कर रहे हैं।
दुधावा क्षेत्र में अब तक कई हमले हो चुके हैं। 4 अगस्त 2024 को तेंदुआ कोड़मुड़ से एक बच्चे को उठा ले गया था, जिसका सिर ही मिला। 25 सितंबर 2024 को दुधावा के नया पारा में एक बच्ची पर हमला हुआ, और 2 अक्टूबर 2024 को एक और बच्चे पर तेंदुए ने हमला किया। इस बच्चे को एक कुत्ते ने छुड़ाया, लेकिन वह विकलांग हो गया।
26 अप्रैल 2025 को दुधावा के आछीडोंगरी में तेंदुए ने आठ वर्षीय बच्चे को अपना शिकार बनाने की कोशिश की, लेकिन उसके बड़े भाई ने उसे बचा लिया। बच्चा अभी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
2022 से 2025 तक तेंदुए और भालू के हमलों में 11 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 70 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। अब ग्रामीणों में डर फैल गया है, और वे शाम होते ही अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं। छोटे बच्चे बाहर खेलने नहीं जाते, और किसान भी खेतों में जाने से डर रहे हैं।

