रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच शांति की तमाम कोशिशों को उस वक्त गहरा झटका लगा जब सोमवार को एक मानवीय सहायता केंद्र पर बमबारी कर दी गई। दक्षिणी यूक्रेन के अग्रिम मोर्चे पर सीमित युद्धविराम की मियाद खत्म होते ही रूसी सेना ने हवाई हमले तेज कर दिए।
राहत सामग्री लेने पहुंचे बेबस नागरिकों पर हुए इस हमले में भारी जनहानि हुई। वहीं, जमीनी मोर्चे पर हो रही बमबारी के साथ-साथ साइबर स्पेस में भी अप्रत्याशित हमला देखा गया, जिससे दोनों देशों में हड़कंप और असमंजस की स्थिति बन गई।
राहत केंद्र और स्कूल पर 10 गाइडेड बमों से हमला, 24 नागरिकों की मौत
यूक्रेन की आपातकालीन सेवा और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह भयानक हमला दक्षिणी यूक्रेन के जापोरिज्जिया क्षेत्र स्थित कोमिशुवाखा गांव में हुआ। यहां एक स्कूल की इमारत में जरूरतमंद लोगों को मानवीय सहायता और राहत सामग्री बांटी जा रही थी और पास में ही एक शेल्टर बना हुआ था।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूसी वायुसेना ने इस नागरिक इलाके पर 10 गाइडेड बम गिराए। इस भीषण हमले में अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है और इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं।
’रूस को शांति नहीं, खूनखराबा चाहिए’, हमले पर भड़के राष्ट्रपति जेलेंस्की
इस हमले के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह हमला स्पष्ट रूप से साबित करता है कि रूस तनाव घटाने या शांति की दिशा में बढ़ने का कोई इरादा नहीं रखता।
जेलेंस्की ने कहा कि जब दोनों देशों के बीच शांति बहाली की हल्की उम्मीदें दिखने लगी थीं, तब इस हमले ने उन प्रयासों पर पानी फेर दिया। उन्होंने दुनिया के देशों से अपील करते हुए कहा कि रूस निर्दोषों की हत्याओं के जरिए यही संदेश दे रहा है कि वह इस युद्ध को और लंबे समय तक खींचना चाहता है।
खेरसॉन में सीमित सीजफायर खत्म होते ही रूस ने तेज किए ड्रोन हमले
यह जानलेवा हमला ऐसे नाजुक मोड़ पर हुआ, जब यूक्रेन के दक्षिणी खेरसॉन इलाके में लागू सीमित युद्धविराम सोमवार को समाप्त हो गया। इस अल्पकालिक समझौते के तहत दोनों पक्षों ने अग्रिम मोर्चों और रूसी कब्जे वाले संवेदनशील क्षेत्रों में फंसे आम लोगों को सुरक्षित निकालने और मानवीय सहायता सामग्री पहुंचाने की अनुमति दी थी।
लेकिन युद्धविराम की अवधि खत्म होते ही रूसी सेना ने फिर से आक्रामक रुख अपना लिया और विभिन्न इलाकों में कई ड्रोन और मिसाइल हमले किए।
साइबर अटैक: इमरजेंसी ऐप हैक कर भेजा गया फर्जी परमाणु अलर्ट
जमीनी युद्ध के बीच रविवार देर रात यूक्रेन और सोमवार सुबह रूस में एक अभूतपूर्व साइबर हमला हुआ। अज्ञात हैकर्स ने दोनों देशों के सरकारी इमरजेंसी अलर्ट ऐप्स को हैक कर लिया। इसके बाद नागरिकों के मोबाइल फोन पर सीधे चेतावनी संदेश जाने लगे, जिनमें परमाणु हमला होने, खतरनाक रेडिएशन का स्तर बढ़ने और रासायनिक हथियारों के खतरे जैसी अफवाहें फैलाई गईं।
राजधानी कीव में अशांति फैलने की बात भी इन मैसेजों में कही गई थी। ये संदेश अंग्रेजी, रूसी और यूक्रेनी भाषाओं में प्रसारित किए गए थे।
’ओरेश्निक मिसाइल आ रही है’ का संदेश, रूसी हैकिंग ग्रुप पर शक
रूसी भाषा में भेजे गए एक फर्जी अलर्ट में लिखा गया था कि ‘पूरे यूक्रेन पर परमाणु खतरा मंडरा रहा है, लेकिन घबराएं नहीं, ओरेश्निक आ रही है’। ज्ञात हो कि ‘ओरेश्निक’ रूस की एक उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है। हालांकि, इन फर्जी संदेशों से यूक्रेन में व्यापक दहशत नहीं फैली और लोगों ने सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी।
रूस की सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े चैनलों का दावा है कि ‘हिटकोर’ नाम के हैकिंग ग्रुप ने इस सिस्टम को हैक करने की जिम्मेदारी ली है। यूक्रेन ने अपने अलर्ट सिस्टम को तुरंत रीसेट कर बहाल कर लिया है।

