आंध्र प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार सुबह उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने वाईएसआर कांग्रेस सांसद वाईएस अविनाश रेड्डी से जुड़े ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू कर दी। यह कार्रवाई पूर्व मंत्री वाईएस विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच का हिस्सा बताई जा रही है। हैदराबाद और कडप्पा जिले में हुई इस कार्रवाई ने वर्षों से सुर्खियों में रहे विवेका हत्याकांड को एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है।
सुबह-सुबह पहुंची ED की टीमें, कई ठिकानों पर एक साथ जांच
शुक्रवार तड़के प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कई स्थानों पर तलाशी अभियान शुरू किया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हैदराबाद और कडप्पा जिले में छह ठिकानों पर तलाशी की पुष्टि हुई है। इनमें वाईएस अविनाश रेड्डी और उनके पिता वाईएस भास्कर रेड्डी से जुड़े परिसर भी शामिल बताए गए हैं।
जांच का फोकस सिर्फ किसी एक दस्तावेज या संपत्ति तक सीमित नहीं बताया जा रहा। ED की कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत है और अधिकारी वित्तीय लेन-देन, संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड तथा मामले से जुड़े दूसरे दस्तावेजों की पड़ताल कर रहे हैं।
विवेका हत्याकांड के दूसरे आरोपियों से जुड़े ठिकाने भी जांच के घेरे में
इस कार्रवाई का दायरा अविनाश रेड्डी के परिसरों से आगे बढ़ता नजर आया। रिपोर्टों के अनुसार, विवेकानंद रेड्डी हत्या मामले से जुड़े कुछ अन्य लोगों के आवासों पर भी ED की टीमें पहुंचीं।
कडप्पा जिले के पुलिवेंदुला और आसपास के इलाकों में अलग-अलग टीमों ने तलाशी ली। जांच एजेंसी की कोशिश यह पता लगाने की है कि हत्या से जुड़े कथित घटनाक्रम के पीछे कहीं कोई वित्तीय लेन-देन या धन के प्रवाह की ऐसी कड़ी तो नहीं है, जिसकी जांच मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत की जा सके।
आखिर ED की एंट्री क्यों हुई?
विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड मूल रूप से एक चर्चित आपराधिक मामला है। 2019 में पुलिवेंदुला स्थित उनके आवास पर उनकी हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच के बाद मामला CBI तक पहुंचा और आगे चलकर इसकी जांच में कई राजनीतिक और कानूनी पहलू सामने आए।
सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर उठाई गई चिंताओं के बीच मुकदमे को आंध्र प्रदेश से हैदराबाद की विशेष CBI अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीता नार्रेड्डी की कुछ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए CBI की ओर से तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किए जाने का उल्लेख किया और आगे की जांच के संबंध में हस्तक्षेप से इनकार किया। साथ ही ट्रायल में तेजी लाने का निर्देश दिया गया था।
अविनाश रेड्डी को लेकर पहले भी हो चुकी है लंबी कानूनी लड़ाई
अविनाश रेड्डी का नाम इस मामले में पहले से ही जांच और अदालती कार्यवाही के कारण चर्चा में रहा है। सुप्रीम कोर्ट के 2023 के रिकॉर्ड में CBI की जांच से जुड़े गंभीर आरोपों और घटनाक्रम का उल्लेख मिलता है। हालांकि, किसी जांच में नाम आना या किसी एजेंसी की कार्रवाई अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए गए सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
अविनाश रेड्डी को तेलंगाना हाई कोर्ट से इस मामले में अग्रिम जमानत भी मिली थी। सुप्रीम कोर्ट में मार्च 2026 की सुनवाई के दौरान भी उनकी अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका का उल्लेख हुआ था।
अब आगे क्या?
ED की मौजूदा कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि तलाशी के दौरान एजेंसी को कौन से दस्तावेज या वित्तीय रिकॉर्ड मिलते हैं। यदि जांच में ऐसे लेन-देन सामने आते हैं जिनका संबंध अपराध से अर्जित धन या उसके इस्तेमाल से जोड़ा जा सके, तो आगे पूछताछ और कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
फिलहाल तलाशी अभियान जारी है और एजेंसी की ओर से बरामद दस्तावेजों या आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। एक बात साफ है। विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड से जुड़ी जांच में ED की एंट्री ने इस पुराने और बेहद संवेदनशील मामले को फिर से आंध्र प्रदेश की सियासत के केंद्र में ला दिया है।

