वक्फ संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दूसरे दिन सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया और इसके बाद याचिकाकर्ताओं को पांच दिन के अंदर अपना जवाब पेश करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी।
केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दी दलीलें
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं, जबकि राकेश द्विवेदी और रणजीत कुमार ने बचाव पक्ष की ओर से बहस की। एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि फिलहाल वक्फ कानून में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार और संसद लोगों को जवाब देने के लिए बाध्य हैं।
एसजी तुषार मेहता ने अदालत से कहा, “यह अदालत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोक पर विचार कर रही है, जो एक दुर्लभ कदम होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ सेक्शनों पर रोक लगाई जाती है, तो यह मामला काफी दूर तक जाएगा, और सरकार को इसका जवाब देना होगा।
एसजी तुषार मेहता ने एक सप्ताह का समय मांगा
मुख्य न्यायाधीश ने यह कहा कि जब तक मामला अदालत में है, स्थिति जस की तस रहनी चाहिए। इसके बाद एसजी तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि केंद्र को प्रारंभिक जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला इतना जटिल है कि इसे जल्दबाजी में हल नहीं किया जा सकता।
सीजेआई ने दी अपनी प्रतिक्रिया
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानून में कुछ सकारात्मक पहलू हैं, लेकिन वह नहीं चाहते कि मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव हो, जिससे मामला प्रभावित हो। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अदालत वक्फ कानून पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा रही है, बल्कि वह स्थिति को यथावत रखना चाहती है। सीजेआई ने आगे कहा, “हम इस स्थिति के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन हम नहीं चाहते कि स्थिति पूरी तरह से बदल जाए।”

