गर्मियों के मौसम में आने वाली तुरई की सब्जी इन 7 लोगों के लिए वरदान…

गर्मी के मौसम ने दस्तक दे दी है. ऐसे में बढ़ती गर्मी और पाचन संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए हेल्थ एक्सपर्ट तुरई (रिज गॉर्ड) के सेवन की सलाह देते हैं. यह एक बेहतरीन और प्राकृतिक विकल्प है. इसके नियमित सेवन से न सिर्फ पाचन तंत्र मजबूत होता है, बल्कि शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी नहीं होती. तुरई सस्ती, आसानी से उपलब्ध और स्वास्थ्यवर्धक सब्जी है, जो गर्मियों में परिवार के हर सदस्य के लिए फायदेमंद साबित होती है.
तुरई के पोषक तत्व-
तुरई में फाइबर, विटामिन सी, विटामिन ए, आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.
तुरई खाने के फायदे-
1. पानी की कमी-
गर्मियों में तुरई की सब्जी खाना स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. तुरई में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखती है.
2. पाचन-
गर्मियों में शरीर में गर्मी बढ़ने से पाचन कमजोर हो जाता है. ऐसे में तुरई की सब्जी हल्की और आसानी से पचने वाली होती है. फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज, गैस तथा अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है.
3. पित्त दोष-
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, तुरई या नेनूआ पित्त दोष को संतुलित रखने में मददगार है.
4. सांस संबंधी समस्या-
जिन लोगों को सांस संबंधी समस्या है उनके लिए तुरई का सेवन फायदेमंद माना जाता है.
5. पेट के कीड़ों-
बुखार, खांसी और पेट के कीड़ों को दूर करने में भी लाभकारी मानी जाती है तुरई की सब्जी.
6. लू से बचने-
तुरई शरीर को ठंडक प्रदान करती है और लू लगने से बचाव में मदद करती है.
7. स्किन-
तुरई में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ रखते हैं और गर्मी से होने वाली त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे फुंसी, रैशेज और खुजली को कम करते हैं.
कैसे और कब करें तुरई का सेवन-
तुरई की सब्जी बनाने के कई आसान तरीके हैं. इसे आलू, चना या चने की दाल के साथ बनाया जा सकता है. कुछ लोग इसे सादा राई संग तड़का देकर या दही के साथ खाना पसंद करते हैं. दिन हो रात दोनों समय तुरई का सेवन किया जा सकता है.
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



