नई दिल्ली | ग्लोबल मार्केट से भारत के लिए दोहरी खुशखबरी सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिनों के सीज़फायर (युद्धविराम) के ऐलान के बाद न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरी हैं, बल्कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी शानदार मजबूती के साथ उभरा है।
रुपये में 50 पैसे का उछाल
बुधवार को कारोबारी सत्र के दौरान भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 50 पैसे की बढ़त के साथ रुपये 92.56 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों में तनाव कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिससे डॉलर की सुरक्षित मांग कम हुई है और उभरते बाजारों (जैसे भारत) की करेंसी को मजबूती मिली है।
महंगाई से मिलेगी राहत?
डॉलर के सस्ता होने और कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने से भारत में आयात (Import) सस्ता होगा। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन लागत पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आम आदमी को महंगाई से बड़ी राहत मिल सकती है।
बाजार की मुख्य बातें:
- डॉलर इंडेक्स (DXY): 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिरकर 98.96 पर आया।
- क्रूड ऑयल: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 3% से अधिक की गिरावट।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य: व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित होने से सप्लाई चेन बहाल।
विशेषज्ञ की राय: “जब भी वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, डॉलर की वैल्यू घटती है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी ज़रूरत का 80% तेल आयात करता है, डॉलर का सस्ता होना अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी जैसा है।”

