मिर्जापुर जिले में हुए भीषण सड़क हादसे के एक दिन बाद शोक में डूबे परिवार अपने प्रियजनों को याद कर बिलख रहे हैं। 11 लोगों की जिंदगी छीन चुकी इस त्रासदी ने कई घरों के चिराग बुझा दिए और पीछे छोड़ दिया दर्द, सन्नाटा और असहनीय खालीपन। पुलिस के अनुसार हादसा बीते बुधवार देर शाम राष्ट्रीय राजमार्ग-135 पर पहाड़ी ड्रमंडगंज क्षेत्र में हुआ जहां कई वाहनों के आपस में टकराने के बाद उनमें लगी आग से 9 लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि 2 अन्य ने गंभीर चोटों के कारण दम तोड़ दिया।
जिगना क्षेत्र के रामपुर गांव के निवासी एवं मृतक पंकज सिंह के बड़े भाई राजू सिंह ने एक न्यूज से कहा कि हम संयुक्त परिवार हैं, सब मिल-जुलकर रहते थे… समझ नहीं आ रहा कि यह सब कैसे हो गया। उन्होंने कहा कि आधी रात को पुलिस उनके घर पहुंची, तब इस भयावह हादसे की जानकारी मिली। सिंह ने कहा कि हमारे पास वहां तक पहुंचने का कोई साधन नहीं था… बस पुलिस ने जो विवरण मांगा, वह उपलब्ध करा दिया। दुर्घटना वाले क्षेत्र के बारे में उन्होंने कहा कि ड्रमंडगंज का वह इलाका बहुत खतरनाक है, बेहद खड़ी चढ़ाई-ढलान है इसीलिए बड़ा संभलना पड़ता है। इस इलाके में हम रात में यात्रा करने से बचते हैं।
वाहनों के पूरी तरह जल जाने के कारण पहचान कैसे हुई, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि परिवार केवल अनुमान लगा सकता है कि पुलिस ने चेसिस नंबर या अन्य माध्यमों से विवरण का पता लगाया होगा। पंकज सिंह का परिवार मैहर (मध्यप्रदेश) में एक मुंडन संस्कार में शामिल होकर लौट रहा था। उनका परिवार खेती-बाड़ी से जुड़ा था और साधारण जीवन जीता था। जीप चालक विष्णु सिंह के भतीजे सत्यम सिंह ने बताया कि चाचा चार भाइयों में सबसे छोटे थे… इंटर तक पढ़े थे और ड्राइविंग कर परिवार का भरणपोषण करते थे। गाड़ी भी उनकी अपनी नहीं थी। उन्होंने कहा कि मैंने उनके साथ गुजरात में दो साल तक काम किया… वह हर किसी की मदद को तैयार रहते थे।

