Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • फूड ट्रेंड समाचार: इंटरनेट पर छाया ‘Swicy’ फ्लेवर ट्रेंड, ट्राय करें फ्यूजन रेसिपी!
    • 17 वर्षीय किशोर की हत्या मामले में पुलिस ने किया बड़ा खुलासा, प्राइवेट पार्ट बेचने के लिए मर्डर! इंस्टाग्राम रील से सीखा खौफनाक प्लान…
    • संस्कृति विभाग द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के लिए 31 अगस्त तक आवेदन आमंत्रित
    • श्री जगन्नाथ मंदिर के ऊपरी हिस्से पर चढ़ा नकाबपोश युवक और जाकर बैठ गया, मचा हड़कंप, छत्तीसढ़ का रहने वाला है आरोपी युवक…
    • सरकारी स्कूल में छात्राओं से छेड़छाड़ पर ग्रामीणों के हंगामे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रिंसिपल को लिया हिरासत में…
    • विश्व रिकॉर्ड:ऋषभ पंत ने रचा इतिहास, टेस्ट में सबसे तेज 100 सिक्स लगाने वाले बन गए बल्ल्बेबाज…
    • होटल में रूम बुक करने,महिला मित्र के साथ होटल पहुंचा था युवक, रिसेप्शन पर ही मौत…
    • इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी पर अभद्र शब्द, बेहद शर्मनाक
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Tuesday, August 18
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»राष्ट्रीय»सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा : 28 में से 14 मुख्यमंत्री गंभीर मामलों में घिरे, 89 केस के साथ कौन नंबर-1?
    राष्ट्रीय

    सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा : 28 में से 14 मुख्यमंत्री गंभीर मामलों में घिरे, 89 केस के साथ कौन नंबर-1?

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inAugust 18, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    कानून
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    देश की राजनीति में आपराधिक मामलों का मुद्दा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने बेहद गंभीर रूप में उभरा है। सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों की तेजी से सुनवाई से जुड़े मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता और अमिकस क्यूरी विजय हंसारिया ने अदालत को बताया कि 28 राज्यों के 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। सूची में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी 89 मामलों के साथ सबसे ऊपर बताए गए हैं। यह आंकड़ा केवल नेताओं के खिलाफ मामलों की संख्या नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की रफ्तार पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

    रेवंत रेड्डी सबसे आगे, कई राज्यों के सीएम भी घेरे में

    सुप्रीम कोर्ट में (Official Supreme Court case reference) पेश रिपोर्ट के मुताबिक, गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे मुख्यमंत्रियों की सूची में तेलंगाना के ए. रेवंत रेड्डी सबसे आगे हैं। उनके खिलाफ 89 मामले बताए गए हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ 29, कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार के खिलाफ 19 और आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ 19 मामले बताए गए हैं।

    रिपोर्ट में केरल के वी.डी. सतीशन के खिलाफ 18 मामले, झारखंड के हेमंत सोरेन के खिलाफ पांच, महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस और हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह के खिलाफ चार-चार मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

    तमिलनाडु के सी. जोसेफ विजय के खिलाफ दो और बिहार के सम्राट चौधरी के खिलाफ दो मामले बताए गए हैं। इसके अलावा सिक्किम के पी.एस. तमांग, पंजाब के भगवंत मान, ओडिशा के मोहन चरण माझी और राजस्थान के भजनलाल शर्मा के खिलाफ एक-एक मामला रिपोर्ट में दर्ज है।

    यहां एक अहम बात समझना जरूरी है किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अंतिम फैसला अदालत करती है। गंभीर मामलों की श्रेणी में आम तौर पर ऐसे अपराध आते हैं जिनमें पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव संबंधी रिपोर्टों में भी इसी तरह की कसौटी का इस्तेमाल किया गया था।

    विधानसभा में भी तस्वीर चिंताजनक

    हंसारिया की रिपोर्ट में सिर्फ मुख्यमंत्रियों का आंकड़ा ही चिंता बढ़ाने वाला नहीं है। राज्यों की विधानसभाओं में भी बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों ने गंभीर आपराधिक मामलों की घोषणा की है।

    रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में 292 में से 170 विधायक, यानी करीब 58 प्रतिशत, गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इसके बाद केरल में करीब 57 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 56 प्रतिशत और तेलंगाना में 49 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ गंभीर मामले बताए गए हैं।

    झारखंड और ओडिशा में यह अनुपात करीब 45-45 प्रतिशत, बिहार में 42 प्रतिशत और महाराष्ट्र में करीब 40 प्रतिशत बताया गया है।

    पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव के बाद एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के विश्लेषण में भी लगभग यही तस्वीर सामने आई थी। 292 विजयी उम्मीदवारों में से 190 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे और 170 ने गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। 2021 में गंभीर मामलों की संख्या 113 थी।

    संसद में भी कम नहीं है दागदार रिकॉर्ड

    लोकसभा के आंकड़े भी राजनीतिक व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार 543 सदस्यीय लोकसभा में 170 सांसदों, यानी करीब 31 प्रतिशत सदस्यों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं।

    कुछ राज्यों में स्थिति और ज्यादा गंभीर नजर आती है। तेलंगाना के 17 में से 11 सांसद, केरल के 21 में से 11 सांसद और बिहार के 40 में से 19 सांसद गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।

    उत्तर प्रदेश में 80 में से 34 सांसद, महाराष्ट्र में 48 में से 17, पश्चिम बंगाल में 42 में से 16 और आंध्र प्रदेश में 25 में से नौ सांसदों के खिलाफ ऐसे मामले बताए गए हैं।

    राज्यसभा में भी स्थिति अलग नहीं है। 233 सदस्यों में से 75 यानी लगभग 33 प्रतिशत सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें 40 सदस्य ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर श्रेणी के मामले बताए गए हैं।

    4,192 मुकदमे अदालतों में अटके

    सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने नेताओं पर मामले दर्ज हैं। सवाल यह भी है कि इन मुकदमों का निपटारा कितनी तेजी से हो रहा है।

    हंसारिया की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2026 तक देश में मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ 4,192 आपराधिक मामले ट्रायल के स्तर पर लंबित थे। इनमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां 1,171 मामले लंबित बताए गए हैं।

    यही वह बिंदु है जहां मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से निकलकर न्याय व्यवस्था की क्षमता का सवाल बन जाता है। सुप्रीम कोर्ट लंबे समय से जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मुकदमों की तेज सुनवाई और विशेष अदालतों की व्यवस्था पर जोर देता रहा है। 2017 में भी अदालत ने सांसदों और विधायकों के मामलों के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था की दिशा में कदम उठाए थे।

    सुप्रीम कोर्ट के सामने अब क्या मांग रखी गई?

    अमिकस क्यूरी की ओर से अदालत से आग्रह किया गया है कि मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों को चिन्हित या नामित किया जाए, ताकि मुकदमों को सामान्य अदालतों की लंबी कतार में न अटकना पड़े।

    इसके साथ ही संबंधित हाईकोर्टों को इन मुकदमों की प्रगति पर सक्रिय निगरानी रखने का निर्देश देने की मांग भी की गई है।

    यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के सामने पहले भी यह तथ्य आ चुका है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ कई मुकदमे वर्षों से लंबित रहे हैं। 2023 में विशेष अदालतों ने 2,000 से ज्यादा ऐसे मामलों का निपटारा किया था, फिर भी बड़ी संख्या में मामले बाकी रह गए।

    रेवंत रेड्डी के 89 मामलों का आंकड़ा क्यों चर्चा में है?

    तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 घोषित आपराधिक मामलों का आंकड़ा नया नहीं है। ADR की उपलब्ध रिपोर्ट में भी उनके हलफनामे के आधार पर 89 मामलों का उल्लेख है, जिनमें 72 गंभीर IPC आरोप बताए गए थे। यानी सुप्रीम कोर्ट में सामने आया आंकड़ा व्यापक रूप से पहले से उपलब्ध चुनावी हलफनामे के रिकॉर्ड से भी जुड़ता है।

    ADR की 2025 की एक रिपोर्ट में 30 विश्लेषित मुख्यमंत्रियों में 12 यानी 40 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे और 10 यानी 33 प्रतिशत ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए थे। उस विश्लेषण में भी रेवंत रेड्डी सबसे अधिक 89 मामलों के साथ शीर्ष पर थे।

    असली चिंता मुकदमे नहीं, फैसले में देरी है

    लोकतंत्र में किसी जनप्रतिनिधि पर आरोप लगना और उसका दोषी साबित होना दो अलग बातें हैं। लेकिन जब गंभीर आरोपों वाले मुकदमे वर्षों तक अदालतों में लंबित रहते हैं, तब दोहरी समस्या पैदा होती है।

    एक तरफ आरोपी को लंबे समय तक मुकदमे का सामना करना पड़ता है और दूसरी तरफ जनता के सामने भी यह सवाल बना रहता है कि जिस व्यक्ति को उसने शासन की जिम्मेदारी सौंपी है, उसके खिलाफ लगे गंभीर आरोपों का न्यायिक निष्कर्ष कब आएगा।

    इसीलिए इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सिर्फ “किस नेता पर कितने केस” नहीं, बल्कि “कितने मामलों का समयबद्ध फैसला हुआ” है।

    सुप्रीम कोर्ट में हंसारिया की ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर राजनीतिक अपराधीकरण और न्यायिक देरी के इसी दोहरे संकट को सामने ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि शीर्ष अदालत विशेष अदालतों, हाईकोर्ट निगरानी और तेज सुनवाई को लेकर क्या दिशा तय करती है।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    नितिन नवीन को इस्तीफा सौंपने के बाद शहजाद पूनावाला ने बताया कारण, कहा-‘नहीं मिल रही थी सैलरी, इसलिए छोड़ दी भाजपा’

    August 18, 2026

    कावेरी जल विवाद पर कर्नाटक को SC की दो टूक, निर्देश का पालन करें, तमिलनाडु का पानी छोड़ें

    August 17, 2026

    Breaking News : बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान, वसुंधरा राजे-स्मृति ईरानी समेत इन दिग्गजों के नाम

    August 17, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.