लेख-आलेख

  • युद्ध की राजनीति और विश्व समुदाय की चुप्पी: मानवता के समक्ष एक अस्तित्वगत संकट

    आज की दुनिया एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है, जहाँ युद्ध और शांति के बीच का फासला निरंतर सिमटता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा, विस्तारवादी नीतियाँ और क्षेत्रीय संघर्षों ने वैश्विक व्यवस्था को गहरे अस्थिरता के भंवर में धकेल दिया है। ऐसे में यह यक्ष प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या मानव सभ्यता पुनः उसी आत्मघाती…

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  • विद्युत क्षेत्र में भारत के नेतृत्वकारी क्षमता की राह बुलंद करना: नई विकास गाथा को ऊर्जा प्रदान कर रहा है भारत-श्री मनोहर लाल

    आर्टिकल- प्राचीन प्रार्थना “तमसो मा ज्योतिर्गमय” – अर्थात हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो – केवल आध्यात्मिक आकांक्षा भर नहीं, अपितु आधुनिक भारत की गाथा को भी दर्शाती है। बीते दशक में, कभी लगातार कमी से परिभाषित होने वाले विद्युत इकोसिस्टदम को दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते, सबसे वैविध्यिपूर्ण और सुधार-प्रेरित विद्युत बाज़ारों में से एक में…

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  • क्यों न UNSC को अब श्रद्धांजलि देकर विसर्जित कर दिया जाए

    एक बार फिर विश्व का बड़ा हिस्सा युद्ध की विभीषिका झेल रहा है और एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद UNSC कोमा में है।  ऐसा पहली बार नहीं है जब सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता प्राप्त पाँच देशों में से किसी देश के युद्ध के समय UNSC पंगु और लाचार नज़र आ रहा हो। पूर्व में भी कई बार…

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  • उत्पादन, परिवर्तन और विविधीकरण: भारत ने किस प्रकार अपनी ऊर्जा प्रणाली को गतिशील बनाया

    आर्टिकल-आम तौर पर, संरचनात्मक ऊर्जा परिवर्तन शायद ही कभी आरामदायक समय के दौरान होते हैं। वे तब होते हैं जब किसी संकट की लंबे समय तक अनदेखी की जाती है और उसके प्रति निष्क्रिय भाव रखा जाता है। यद्यपि, पिछले 11 वर्षों के दौरान, मोदी सरकार ने इसके विपरीत काम किया है। इसने ऊर्जा क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन किए, तब…

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  • खरी–खरी : क्या ट्रंप की शक्ति-प्रदर्शन की आदत दुनिया को तबाही की ओर धकेल रही है?

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका ने दुनिया को एक और टाली जा सकने वाली तबाही की ओर धकेल दिया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिकी और इज़राइली संयुक्त बलों ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के नाम से ईरान के खिलाफ एक व्यापक हवाई अभियान शुरू किया। इस अभियान ने पहले ही हजारों लोगों की जान ले ली है, नागरिक…

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  • आर्टिकल-निवारक स्वास्थ्य देखभाल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है योग-प्रतापराव जाधव द्वारा

    आर्टिकल- बीते दशक में योग को केवल पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धति के रूप में ही नहीं सराहा गया, बल्कि उसे उत्त रोत्तवर रूप से स्वास्थ्य और कल्याण के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण के रूप में भी पहचाना जाने लगा है। वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और वैश्विक सहयोग अब हमें योग को केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि एक सशक्तै जन-स्वास्थ्य…

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  • …भारत सिर्फ अपने हितों के साथ

    गत दो सप्ताह से पश्चिमी एशिया भीषण युद्ध की आग में धधक रहा है। एक ओर इसराईल-अमरीका का गठबंधन है, तो दूसरी ओर ईरान, जिसे प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से रूस और चीन की रणनीतिक सहानुभूति प्राप्त है। सभी पक्षों से भारत के कूटनीतिक-व्यापारिक संबंध हैं। ऐसे में भारत को क्या करना चाहिए और किसका पक्ष लेना चाहिए, इस प्रकार के प्रश्न…

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  • सपनों की एक और बारात

    एकाध वर्ष में हम दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएंगे, और आजादी के सौ वर्ष पूरे होने के जश्न तक एक पूरे विकसित राष्ट्र के शायद सर्वोपरि हो जाने का गर्व स्वीकार करेंगे। सर्वोपरि का अर्थ जानते हो, दुनिया की नंबर एक शक्ति जो अमरीका और चीन को भी पछाड़ देगी। इसके साक्ष्य के लिए हम कहते हैं, पूरा…

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  • न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की चर्चा रोकने की हड़बड़ी…

    पहली नजर में बात चाय के प्याले में तूफान जैसी थी। लेकिन जरा गहराई से देखें तो एन.सी.ई.आर.टी. की किताब में  न्यायपालिका के भ्रष्टाचार के जिक्र पर उठा बवाल हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की एक गहरी चुनौती की ओर इशारा करता है। सवाल यह नहीं है कि न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश किसने और क्यों की, असली सवाल यह है…

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  • भारत-अमरीका व्यापार समझौता …

    अमरीका की वैश्विक सद्भावना खोने के नतीजे में, लंबे समय में अमरीका की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है। दुनिया भर के देश अब डॉलर के बजाय अपनी स्थानीय करेंसी में अंतरराष्ट्रीय भुगतान कर रहे हैं। ब्रिक्स जैसे समूह ज्यादा अहम होते जा रहे हैं… अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए विवादित टैरिफ को रद्द कर दिया…

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