लेख-आलेख

  • क्या ट्रम्प विश्व युद्ध के भयंकर परिणामों से परिचित हैं?…

    ट्रम्प की ‘बाडी-लैंग्वेज’ से तो नहीं लगता कि उन्हें युद्ध के भयानक परिणामों का ज्ञान हो। यह तो ठीक है कि अमरीका की ‘राजनीतिक- दादागिरी’ सब देशों पर भारी है लेकिन विश्व के राजनेता उन देशों की लिस्ट तो निकाल कर पढ़ें जिन्हें अमरीका की दादागिरी ने तबाह कर दिया। अमरीका की विस्तारवादी राजनीति आज दुनिया को तृतीय विश्व युद्ध…

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  • तेल के खेल में मोदी के आगे, भारत-वेनेजुएला वार्ता के बाद दुनिया में मची हलचल

    सूत्रों के अनुसार अमेरिका ने भारत को संकेत दिया है कि वह शीघ्र ही वेनेजुएला से तेल खरीद दोबारा शुरू कर सकता है ताकि रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता घटे। यह पहल भारत अमेरिका ऊर्जा संबंधों को नए सांचे में ढालने की अमेरिकी कोशिश का हिस्सा है। भारत और वेनेजुएला के बीच कूटनीति ने अचानक तेज रफ्तार पकड़ ली है।…

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  • पंजाब के लिए भाजपा कैसे कर रही हरियाणा से अपनी रणनीति का पुनर्निर्माण

    पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव अभी दूर है लेकिन राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आना शुरू हो गया है। विरोध प्रदर्शनों, कानून व्यवस्था पर बहसों और केंद्र-राज्य की खींचतान के बीच, भारतीय जनता पार्टी एक दूरदर्शी पार्टी के धैर्य के साथ चुपचाप अपनी पंजाब रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रही है। इस पुनर्समायोजन के केंद्र में एक तेजी से…

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  • समता के बहाने असमानता का कानूनी…

    आज ज्यादातर क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का आधार जातीयता है। भाजपा भी यूजीसी कानून के जरिए इसी रास्ते पर चलती दिखाई दे रही है। ऐसे कानूनी उपायों को बढ़ावा देने से जातिगत दलों का वजूद भारतीय लोकतंत्र में और बढ़ेगा। इस्लाम आधारित दल भी मजबूत होंगे। यह स्थिति देश के भविष्य के लिए खतरनाक तो है ही, संविधान की भावना सामाजिक…

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  • सिर्फ समझौता नहीं, हमारे भविष्य का रोडमैप है भारत-यूरोपीय संघ एफटीए-पीयूष गोयल

    आर्टिकल– भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक कूटनीति में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। इससे लाखों रोजगार पैदा होंगे तथा भारतीय युवाओं और किसानों के लिए व्यापक अवसरों का सृजन होगा। इसके साथ ही लगभग 2 अरब की उस आबादी के लिए धन पैदा होगा जो मिल कर वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक-चौथाई भाग है।विश्व…

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  • यू.जी.सी. विनियम 2026 पर स्टे…

    सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वीरवार यू.जी.सी. विनियम 2026 पर स्टे लगाने के बाद देश के हर सामान्य नागरिक विशेषकर छात्रों और शिक्षकों ने राहत की सांस ली है। उसकी जगह कोर्ट ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए फिलहाल पूर्ववर्ती 2012 के नियम को लागू कर दिया है। मार्च के महीने में 2026 के विनियम पर विस्तृत सुनवाई होगी। लेकिन माननीय…

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  • गुजरात में ‘प्रगति’: सक्रिय शासन के जरिए विकास के इंजन को गति-श्री पंकज जोशी

    आर्टिकल– कुशल शासन की दिशा में भारत की यात्रा अक्सर एक विशाल संघीय ढांचे के तहत कार्यान्वयन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों को रेखांकित करती है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2015 में स्थापित ‘प्रगति’ [सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन)] नामक पहल, नौकरशाही की पेचीदगियों को दूर करने के एक शक्तिशाली तंत्र के रूप में…

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  • प्रगति@50 : शासन को इरादा नहीं,डिलिवरी परिभाषित करती है-टी.के. रामचंद्रन

    आर्टिकल- सरकार के दो परिवर्तनकारी कदमों—पीएम गति शक्ति और प्रगति—का विशाल परियोजनाओं की योजना बनाने, उन्हें कार्यान्वित करने और उनकी निगरानी करने पर गहरा असर पड़ा है। इस लेख में हम बाद वाले कदम के बारे में चर्चा कर रहे हैं।प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) प्रारूप के तहत आयोजित 50वीं उच्च-स्तरीय समीक्षा दर्शाती है कि शासन के प्रति भारत…

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  • बजट से जुड़े पूर्वानुमान…

    उद्योग जगत के प्रतिभागियों ने आगामी बजट के लिए इनोवेशन और अनुसंधान एवं विकास और निर्यात उन्मुख क्षेत्रों को समर्थन, रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को शीर्ष प्राथमिकताएं बताया है। सर्वे में शामिल लोगों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भू-राजनीतिक जोखिम, रोजगार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रमुख चुनौतियों के रूप में भी चिन्हित किया है। 2025-26 में…

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  • बिना रुकावट के शासन: बुनियादी ढांचे के लिए भारत की संस्थागत संरचना-अरिहन्‍त कुमार

    आर्टिकल-आज़ादी के बाद से, बुनियादी ढांचे ने भारत की प्रगति की सोच को आकार दिया है। कल्‍पना साफ़ थी: रेलवे दूर-दराज के इलाकों को जोड़ेगी, राजमार्ग राज्यों के बीच व्यापार करेंगे, बांध ऊर्जा और सिंचाई का आधार बनेंगे, और बिजली की लाइनें सबसे दूर के गांवों तक रोशनी पहुंचाएंगी। जैसे-जैसे प्रोजेक्ट बड़े होते गए, वे और भी उलझते गए। ज़मीन…

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