लेख-आलेख
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कटाक्ष: देखो, ऐ ईरानियो तुम ये काम ना करो, विश्व गुरु का नाम बदनाम ना करो!
हमें तो ईरान वालों के लिए सॉरी फील हो रहा है, बुरा सा लग रहा है। नहीं, नहीं, हम किसी को सॉरी नहीं बोल रहे हैं। हम किसी को सॉरी बोलने नहीं जाते। किसी को भी नहीं। फिर ईरान वाले तो आते ही किस गिनती में हैं। पहले कभी किसी से सॉरी बोला होगा तो बोला होगा, पर मोदी युग…
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…राजनीति में वंशवाद के विरोधी नीतीश फंस गए बेटे के व्यामोह में
नीतीश कुमार ने कभी कहा था- ‘कर्पूरी जी ने कभी अपने परिवार को आगे नहीं बढ़ाया. कुछ लोग सिर्फ परिवार को प्रमोट करते हैं. क्रपूरी जी की प्रेरणा से मैंने भी परिवार को नहीं बढ़ाया.’ निशांत कुमार के राजनीति में आ जाने के बाद नीतीश कुमार के इस कथन का क्या होगा!बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीति में वंशवाद के…
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बालेन से नेपाल को ढेर सारी उम्मीदें…
नेपाल का चुनाव परिणाम दुनिया के उन तमाम देशों के शासकों को एक सबक है, जो राष्ट्र को अपनी जागीर समझ कर शासन चलाने की भूल कर रहे हैं। भारत के पड़ोसी इस नन्हें राष्ट्र का चुनाव परिणाम युवा शक्ति के बदलाव की दृढ़ इच्छाशक्ति का नतीजा है, जहां उनमें पलायन, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रभावशाली लोगों के बच्चों तक ही…
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विशेष आलेख-बिहान योजना ने श्रीमती सगो तेता के जीवन में लाया नवा बिहान
आजीविकामूलक गतिविधियों से मिली फर्श से अर्श तक की मंजिल धनंजय राठौर, सयुक्त संचालक, ताराशंकर सिन्हा, सहायक संचालक जनसंपर्क रायुपर- श्रीमती सगो तेता स्व-सहायता समूह और बिहान से जुड़कर न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने स्वाभिमान और आत्मविश्वास को भी नई पहचान दी है। आज कांकेर जिला के गांव ग्राम गढ़पिछवाड़ी की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा…
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मोदी की चुप्पी, कूटनीतिक मायने…
सितंबर 2024 में खामेनेई ने एक और पोस्ट में भारत का उल्लेख किया, जिसे विदेश मंत्रालय ने भ्रामक बताया। हर बार भारतीय पक्ष ने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। भारत का तटस्थ रुख उसे एक मध्य मार्ग पर रखता है- अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करते हुए किसी भी गुट को नाराज करने से बचता है। अमरीका-ईरान युद्ध के आगे…
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सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना: किफायती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं के लिए जनऔषधि परियोजना का रणनीतिक विकास-श्री जगत प्रकाश नड्डा
जन औषधि सस्ती भी, भरोसेमंद भी, सेहत की बात, बचत के साथ। किसी राष्ट्र की प्रगति का असली पैमाना अक्सर इस बात से परिलक्षित होता है कि उसके नागरिक स्वास्थ्य सेवा जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक कितनी आसानी से पहुँच सकते हैं। दशकों तक, भारत के लाखों लोगों के स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए दवाओं की उच्च लागत एक प्रमुख वित्तीय…
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ईरान की ऐतिहासिक उथल-पुथल…
1979 तक आते-आते मोहम्मद रजा पहलवी के खिलाफ विद्रोह बहुत तेज हो गया। ईरानियों की निगाह में अमेरिका ‘शैताने बुजुर्ग’, यानी सबसे बड़ा शैतान हो गया था। अब ईरान के पक्के दो दुश्मन हो गए। अमेरिका तो इसलिए कि वह ईरान को अपनी कालोनी बनाना चाहता है और आर्थिक साधनों का दोहन करना चाहता है। अरबों से दुश्मनी तो पुरानी…
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दबी हुई ऊर्जा का सांस्कृतिक विस्तार है होली…
होली केवल लोकानुष्ठान नहीं, यह मनुष्य की सामूहिक आत्मा का खुला पाठ है-रंगों में लिखा हुआ, हंसी में उच्चरित और वसंत की हवा में बहता हुआ. यही अनुभूति सामान्य जन भी अपने सहज शब्दों में व्यक्त करता है. पीली सरसों का अनंत फैलाव केवल कृषि-दृश्य नहीं, वह प्रकृति और मनुष्य के सहअस्तित्व की दृश्य कविता है. धरती यहां स्वयं रंग…
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भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता: वस्त्र उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक व्यापारिक उपलब्धि-गिरिराज सिंह
आर्टिकल- भारत ने वैश्विक मंच पर ऐसा कदम रखा है, जिसे दुनिया अनदेखा नहीं कर सकी। 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) औपचारिक रूप से पूरा हुआ। यह एक ऐतिहासिक पल था, जिस पर दशकों से काम हो रहा था। यह समझौता दूरदृष्टि, दृढ़ संकल्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत…
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अर्थव्यवस्था का एक नया नजरिया: भारत के जीडीपी के आधार में संशोधन को समझना-श्री सौरभ गर्ग
आर्टिकल- सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी किसी देश की अर्थव्यवस्था के आकार और उसकी सेहत को आंकने का एक तरीका है। यह एक राष्ट्र का वह रिपोर्ट कार्ड है, जो हमें बताता है कि वह देश वस्तुओं और सेवाओं के लिहाज से कितना उत्पादन कर रहा है। जब जीडीपी बढ़ रही होती है, तो आमतौर पर इसका मतलब होता है कि…
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