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भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन आज भारतीय नौसेना में होगी शामिल…

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार सुबह एक पोस्ट किया-शब्द नहीं शक्ति है अरिदमन। भारतीय नौसेना के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में INS अरिदमन भारत की तीसरी स्वदेशी रूप से निर्मित परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) जल्द ही कमीशन होने वाली है। हालांकि, राजनाथ सिंह के इस ट्वीट से चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ा दी है। पहले ही ये देश आईएनएस तारागिरी को लेकर टेंशन में होंगे, जिसे आज भारतीय नौसेना में शामिल किया जा रहा है।
INS अरिदमन की क्या हैं खूबियां
- INS अरिदमन अरिहंत-श्रेणी की तीसरी SSBN पनडुब्बी है, जिसे भारत के उन्नत प्रौद्योगिकी वेसेल (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विकसित किया गया है।
- यह पनडुब्बी समुद्र से परमाणु हमले की क्षमता प्रदान करती है, जो भारत की ‘पहले इस्तेमाल नहीं’ (No-First-Use) नीति के तहत प्रहार क्षमता को मजबूत बनाती है।
- यह 90% से अधिक स्वदेशी तकनीक से निर्मित है, जिसमें इसका परमाणु रिएक्टर भी शामिल है। इसे विशाखापट्टनम स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर ने विकसित किया है।
अरिदमन के आने से क्या बदलेगा
- परमाणु त्रिआयामी क्षमता मजबूत होगी: INS अरिदमन की तैनाती से भारत की अंडरवाटर सेकंड-स्ट्राइक क्षमता बेहद मजबूत होगी, जो किसी भी परमाणु प्रतिरोधक नीति के लिए आधारशिला होती है।
- लगातार समुद्री निगरानी हो सकेगी: अरिहंत और अरिघात के साथ तीसरी SSBN जुड़ने से भारत अब निरंतर समुद्र में रणनीतिक निगरानी बनाए रख सकेगा।
- क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण: हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह पनडुब्बी भारत की रणनीतिक क्षमता और सुरक्षा दायरे को और बढ़ाती है।
- आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि: लगभग पूर्ण स्वदेशी निर्माण भारत की जटिल परमाणु पनडुब्बी तकनीक पर पकड़ को दर्शाता है और रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है।
- नौसेना का आधुनिकीकरण: यह पनडुब्बी नौसेना के आधुनिक बेड़े में महत्वपूर्ण जोड़ है और भारत की समुद्री शक्ति को वैश्विक स्तर पर बढ़ाती है।
INS तारागिरी भारतीय नौसेना की बढ़ाएगा ताकत
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्वदेश निर्मित उन्नत युद्धपोत तारागिरी को शुक्रवार को विशाखापत्तनम में नौसेना के बेड़े में शामिल करने जा रहे हैं, जो भारत के पूर्वी तट के सामरिक महत्व को बताता है।
- राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार देर रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा-मैं विशाखापत्तनम में उन्नत युद्धपोत तारागिरी का जलावतरण करने जाऊंगा…इसे बेड़े में शामिल करना भारत के पूर्वी समुद्री तट के सामरिक और समुद्री महत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इसे बेड़े में शामिल करना भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता और संचालन शक्ति को मजबूत करने पर लगातार ध्यान देने को दर्शाती है।
प्रोजेक्ट 17A के तहत तारागिरी की क्या है खूबियां
- ‘प्रोजेक्ट 17A’ के तहत चौथे प्लेटफॉर्म के रूप में तारागिरी 6,670 टन का युद्धपोत है, जिसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई द्वारा बनाया गया है, जो उन्नत डिजाइन और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है।
- इस युद्धपोत की बनावट अधिक स्लिम है, जिससे इसका रडार पर दिखाई देने वाला आकार बहुत कम हो जाता है और यह जटिल समुद्री परिस्थितियों में अधिक सुरक्षित रहने में सक्षम है।
- यह पोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है और भारत के घरेलू रक्षा तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है, जिसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।
- तारागिरी में संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली लगी है, जो इसे उच्च गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता प्रदान करती है।
- यह युद्धपोत अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है, जिनमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली शामिल हैं। इन सभी को आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे उभरते खतरों का तेजी और सटीकता से सामना किया जा सकता है।
- युद्धक भूमिका के अलावा तारागिरी को मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिससे शांति और संघर्ष दोनों स्थितियों में इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है।



