केदारनाथ: उत्तराखंड की प्रसिद्ध चार धाम यात्रा का आगाज हो चुका है। इस क्रम में बुधवार पूरे विधि-विधान के साथ सुबह 8 बजे केदारनाथ धाम के कपाट खोले दिए गए। गर्मियों में बाबा केदार का धाम में आगमन हो चुका है। इस मौके पर केदारनाथ धाम में विशेष पूजा-अर्चना की गई। सीएम पुष्कर सिंह धामी केदारनाथ धाम में मौजूद रहे। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही ‘हर हर महादेव’ का जयकारा लगाया। सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबे पत्र के जरिए उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने चार धाम यात्रा को सनातन संस्कृति के दर्शन से जोड़ा।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर किए गए पोस्ट में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती पर आज श्री केदारनाथ धाम के कपाट पूरे विधि-विधान के साथ हम सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम और चार धाम की यह यात्रा हमारी आस्था, एकता और समृद्ध परंपराओं का दिव्य उत्सव है। इन यात्राओं से हमें भारत की सनातन संस्कृति के दर्शन भी होते हैं।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि इस वर्ष चारधाम यात्रा के आरंभ उत्सव पर उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए मैंने एक पत्र के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। मेरी कामना है कि बाबा केदार सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और आपकी यात्राओं को शुभ करें।
पत्र में पीएम ने क्या लिखा?
देश के लोगों के नाम लिखे पत्र में पीएम नरेंद्र मोदी ने चार धाम यात्रा का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर चार धाम यात्रा का शुभारंभ हो गया है। 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल चुके हैं। आज से केदारनाथ धाम की यात्रा प्रारंभ हो रही है। 23 अप्रैल को बद्धीनाथ धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे। बाबा केदार के दर्शन सहित चारों धामों की यह पावन यात्रा भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का एक भव्य उत्सव है।
पीएम मोदी ने कहा कि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्राओं से भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी थी। जगद्गुरु रामानुजाचार्य और जगद्गुरु माधवाचार्य ने भी अपने धर्मविचारों को समृद्ध करने के लिए बद्रीनाथ की यात्रा की थी। आज भी हिमालय की गोद में विराजमान ये चारों धाम हमारी शाश्वत आस्था और विश्वास के दिव्य केंद्र हैं।
एक भारत, श्रेष्ठ भारत का जिक्र
प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा है कि हर वर्ष विविध भाषाओं, परपराओं और संस्कृतियों के लोग यहां पहुंचते हैं और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के भाव को और अधिक सशक्त करते हैं। इस वर्ष की यात्रा भी इसी परंपरा का विस्तार है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है-
अग्निष्टोमादिभिर्यज्ञैरिष्ट्वा विपुलदक्षिणैः।
न तत्फलमवाप्रोति तीर्थाभिगमनेन यत्।
पीएम ने इसका भाव बताते हुए कहा कि बड़े-बड़े यज्ञों और दान आदि से हमें अपार पुण्य प्राप्त होते हैं। इन अनुष्ठानों से भी कहीं अधिक पुण्य, हमें तीर्थ यात्राओं से प्राप्त होता है।
विकसित भारत में उत्तराखंड महत्वपूर्ण
पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुछ वर्ष पहले, बाबा केदार के द्वार पर मैंने कहा था कि ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा। आज उत्तराखंड की प्रगति इस विश्वास को साकार कर रही है। उत्तराखंड आज पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति तीनों क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड में विकास का जो महायज्ञ चल रहा है, उसने चार धाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाया है।
डिजिटल उपवास का अनुरोध
पीएम मोदी ने चार धाम यात्रा को लेकर कहा कि सरकार की पहल से यहां आने वाले श्रद्धालुओं, संत जनों और पर्यटकों को बहुत सुविधा हो रही है। इन सारे कामों में उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता का ध्यान रखने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। मैं उत्तराखंड आने वाले हर अतिथि से भी कहूंगा कि वो इस नए अनुभव का आनंद जरूर लें। सभी यात्रीगण अपनी यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास रखने और उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को जीने का प्रयास भी करें। इससे आपको एक अलग संतुष्टि भी मिलेगी।
पांच संकल्पों का जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चार धाम की हर यात्रा में हम एक संकल्प लेकर अपने मूल स्थान से देवभूमि के लिए आते रहे हैं। इसी क्रम में मैं भी आपसे पांच संकल्पों का आग्रह करना चाहता हूं:
पहला संकल्प- स्वच्छता सर्वोपरि: पीएम ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे धाम और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। नदियों को साफ रखने के लिए अपना योगदान दें। सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त यात्रा का संकल्प लें और इस पावन धरा की गरिमा को बनाए रखें।
दूसरा संकल्प- प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता: पीएम ने कहा कि हिमालय की इस दिव्य धरा के प्रति संवेदनशील रहें। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए, ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।
तीसरा संकल्प- सेवा, सहयोग और एकता पर बल: पीएम ने चार धाम यात्रा को लेकर कहा कि पुरातन काल से हमारी तीर्थ यात्राएं सर्वज्ञन की सेवा और सामाजिक समरसता को स्थापित करने का माध्यम रही हैं। आज भी लोग इसी सेवा भाव से तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं। मैं चार धाम आने वाले हर तीर्थयात्री सें भी आग्रह करता हूं कि वो अपनी यात्रा के हर दिन किसी न किसी रूप में लोगों की सेवा का एक काम अवश्य करें। सहयात्रियों की सहायता करें और देश की विभिन्न जगहों से आए लोगों से जुड़ें। उनकी परंपराओं का सहभागी बनकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को इस यात्रा के माध्यम से सशक्त करें।
चौथा संकल्प- वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा: पीएम मोदी ने यात्रा में स्थानीय चीजों को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि अपने मूल स्थान से चलकर यात्रा से घर लरैटने तक अपने कुल खर्च का पांच प्रतिशत हिस्सा लोकल उत्पादों को खरीदने पर जरूर खर्च करें। अगर किसी स्थानीय चीज की जरूरत इस मौसम में नहीं भी है, तो भी उसे भविष्य के इस्तेमाल के भाव से ही खरीदने का प्रयास करें।
पांचवां संकल्प- अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का पालन: पीएम मोदी ने यात्रा में अनुशासन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करें। एक जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में इस तीर्थ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाएं। हम ये प्रयास करें कि हमारी यात्रा से, इस यात्रा के आयोजन और प्रबंधन में जितने भी लोग लगे हुए हैं, उन्हें कोई असुविधा ना हो।
डिजिटल क्रिएटर्स भी अनुरोध
पीएम नरेंद्र मोदी ने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स से भी अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में हमारे क्रिएटर्स, इफ्लूएंसर्स चार धाम दर्शन के लिए जाने लगे हैं। मैं सभी से ये आग्रह करूंगा कि वो उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और यहां की छोटी-छोटी परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करें। मुझे विश्वास है कि इन संकल्पों के साथ आपकी यह यात्रा एक अनुपम अनुभव से जुड़ेगी।
पीएम ने कहा कि चार धाम यात्रा का हर पड़ाव आपको प्रकृति की पवित्रता, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों से और अधिक जोड़ेगा। बाबा केदार के साथ ही चारों धामों का आशीर्वाद आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई प्रेरणा और नए संकल्पों का संचार करे। मेरी यही कामना है। उन्होंने तीर्थयात्रियों के सफल, सुरक्षित, दिव्य और आत्मीय यात्रा की शुभकामनाएं दी।

