लेख-आलेख

  • सिर्फ समझौता नहीं, हमारे भविष्य का रोडमैप है भारत-यूरोपीय संघ एफटीए-पीयूष गोयल

    आर्टिकल– भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक कूटनीति में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। इससे लाखों रोजगार पैदा होंगे तथा भारतीय युवाओं और किसानों के लिए व्यापक अवसरों का सृजन होगा। इसके साथ ही लगभग 2 अरब की उस आबादी के लिए धन पैदा होगा जो मिल कर वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक-चौथाई भाग है।विश्व…

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  • यू.जी.सी. विनियम 2026 पर स्टे…

    सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वीरवार यू.जी.सी. विनियम 2026 पर स्टे लगाने के बाद देश के हर सामान्य नागरिक विशेषकर छात्रों और शिक्षकों ने राहत की सांस ली है। उसकी जगह कोर्ट ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए फिलहाल पूर्ववर्ती 2012 के नियम को लागू कर दिया है। मार्च के महीने में 2026 के विनियम पर विस्तृत सुनवाई होगी। लेकिन माननीय…

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  • गुजरात में ‘प्रगति’: सक्रिय शासन के जरिए विकास के इंजन को गति-श्री पंकज जोशी

    आर्टिकल– कुशल शासन की दिशा में भारत की यात्रा अक्सर एक विशाल संघीय ढांचे के तहत कार्यान्वयन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों को रेखांकित करती है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2015 में स्थापित ‘प्रगति’ [सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन)] नामक पहल, नौकरशाही की पेचीदगियों को दूर करने के एक शक्तिशाली तंत्र के रूप में…

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  • प्रगति@50 : शासन को इरादा नहीं,डिलिवरी परिभाषित करती है-टी.के. रामचंद्रन

    आर्टिकल- सरकार के दो परिवर्तनकारी कदमों—पीएम गति शक्ति और प्रगति—का विशाल परियोजनाओं की योजना बनाने, उन्हें कार्यान्वित करने और उनकी निगरानी करने पर गहरा असर पड़ा है। इस लेख में हम बाद वाले कदम के बारे में चर्चा कर रहे हैं।प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) प्रारूप के तहत आयोजित 50वीं उच्च-स्तरीय समीक्षा दर्शाती है कि शासन के प्रति भारत…

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  • बजट से जुड़े पूर्वानुमान…

    उद्योग जगत के प्रतिभागियों ने आगामी बजट के लिए इनोवेशन और अनुसंधान एवं विकास और निर्यात उन्मुख क्षेत्रों को समर्थन, रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को शीर्ष प्राथमिकताएं बताया है। सर्वे में शामिल लोगों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भू-राजनीतिक जोखिम, रोजगार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रमुख चुनौतियों के रूप में भी चिन्हित किया है। 2025-26 में…

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  • बिना रुकावट के शासन: बुनियादी ढांचे के लिए भारत की संस्थागत संरचना-अरिहन्‍त कुमार

    आर्टिकल-आज़ादी के बाद से, बुनियादी ढांचे ने भारत की प्रगति की सोच को आकार दिया है। कल्‍पना साफ़ थी: रेलवे दूर-दराज के इलाकों को जोड़ेगी, राजमार्ग राज्यों के बीच व्यापार करेंगे, बांध ऊर्जा और सिंचाई का आधार बनेंगे, और बिजली की लाइनें सबसे दूर के गांवों तक रोशनी पहुंचाएंगी। जैसे-जैसे प्रोजेक्ट बड़े होते गए, वे और भी उलझते गए। ज़मीन…

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  • शाह के प्लान पर चले नवीन, कोलकाता को साइड कर दुर्गापुर-आसनसोल से मिशन बंगाल में जुटे

    अमित शाह के प्लान के अनुसार बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने दुर्गापुर आसनसोल से मिशन बंगाल शुरू कर रहे हैं। वह अपने पहले दौरे में कोलकाता से दूर ही रहेंगे। उनके दौरे के बाद खुद अमित शाह संगठन को सजाने पश्चिम बंगाल में उतरेंगे। नितिन नवीन को बिहारी वोटरों के लिए आगे किया गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने…

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  • हम भारत के लोग और हमारा सतत दायित्व-राजनाथ सिंह

    आर्टिकल – भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 16 मई 1952 को पहली लोकसभा को संबोधित करते हुए, संसद सदस्यों को उनके लोकतांत्रिक दायित्वों की गंभीरता का स्मरण कराया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि संविधान के लागू होते ही, राष्ट्रपति के निर्वाचन और पहले आम चुनाव के साथ स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का प्रथम चरण पूरा…

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  • UGC Regulations में ऐसा क्या है जिसका सवर्ण कर रहे हैं विरोध?… 

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नए नियमों को लेकर देश में राजनीति तेज हो गई है। इन नियमों के लागू होते ही सवर्ण समुदाय की नाराजगी की खबरें सामने आने लगी हैं और इसके खिलाफ विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक यह दावा किया जा…

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  • आखिर पहले की सरकारों ने नेताजी के पराक्रम को क्यों छिपाया?…

    पराक्रम दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि भारत की उस चेतना का उत्सव है जिसने गुलामी को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। यह दिन उस विचार का प्रतीक है कि स्वतंत्रता भीख में नहीं मिलती, उसे संघर्ष से प्राप्त किया जाता है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम भारतीय इतिहास में केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी के…

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