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CG HC Rape Case: ‘पीड़िता सरकारी अधिकारी, समझ सकती है अच्छा-बुरा’—हाई कोर्ट ने आरोपी को किया बरी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की सरकारी अधिकारी ने शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म का आरोप लगाया था, निचली अदालत ने आरोपी को 10 साल की सजा दी, लेकिन हाई कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।

बिलासपुर (CG HC Rape Case): छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में झूठे विवाह के वादे पर दुष्कर्म के आरोप में निचली अदालत द्वारा 10 साल की सजा पाए युवक को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।

न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि पीड़िता न केवल बालिग और विवाहित थी, बल्कि वह एक सरकारी अधिकारी भी थी, जो अपने भले-बुरे का निर्णय खुद लेने में सक्षम थी। ऐसे में यह साबित नहीं हो पाया कि आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए या विवाह का झूठा वादा कर धोखा दिया।

मामला जांजगीर-चांपा जिले से जुड़ा है, जहां 2017 में आरोपी अरविंद श्रीवास पर पीड़िता से विवाह का वादा कर दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। पीड़िता गर्भवती हुई, जिसका बाद में 27 दिसंबर 2017 को गर्भपात कराया गया। 1 फरवरी 2018 को एफआईआर दर्ज हुई। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए 10 साल की कठोर कारावास और जुर्माना लगाया था, जिसका आरोपी ने हाई कोर्ट में विरोध किया।

हाई कोर्ट ने कहा कि घटना के वक्त पीड़िता 29 वर्ष की, शिक्षित और कृषि विभाग में अधिकारी थी। वह पहले से विवाहित थी और तलाकशुदा नहीं थी, इसलिए वैधानिक रूप से विवाह के योग्य नहीं थी। आरोपी और पीड़िता का सगाई समारोह 28 जून 2017 को हुआ था और दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे। गर्भपात की अनुमति भी पीड़िता ने लिखित दी थी, जिसमें आरोपी को उसका पति बताया गया था।

पीड़िता ने कोर्ट में कहा कि अगर उसका विवाह आरोपी से हो जाता तो वह रिपोर्ट दर्ज नहीं कराती। पीड़िता के पिता ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने सगाई की लागत वापस न मिलने पर ही शिकायत की थी।

हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बालिग और विवाहित महिला, जो लंबे समय तक सहमति से संबंध रखती है, वह झूठे वादे पर दुष्कर्म का दावा नहीं कर सकती।

न्यायालय ने कहा कि मामले में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जो दिखाए कि संबंध केवल विवाह के झूठे वादे के कारण बने। इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का दोषसिद्धि आदेश रद्द कर दिया और कहा कि आरोपी जमानत पर है, इसलिए उसे आत्मसमर्पण की जरूरत नहीं।

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